Uttarakhand: वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की किल्लत से महंगा हुआ खाना, होटल-ढाबों में बढ़े दाम

वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की किल्लत का लोगों की थाली पर असर, होटल-ढाबों में खाने-पीने के दाम बढ़े

उत्तराखंड में वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की किल्लत का असर अब आम लोगों की जेब और थाली पर साफ दिखाई देने लगा है। शहर में होटल, रेस्टोरेंट, रेहड़ी और ढाबा संचालकों को पर्याप्त मात्रा में वाणिज्यिक गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। इसके चलते बढ़ती लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर डाला जा रहा है और खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ा दिए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, पहले जहां सस्ती थाली करीब 50 रुपये में मिल जाती थी, अब उसकी कीमत बढ़कर 70 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह पराठों के दाम भी 30-40 रुपये से बढ़कर 60-70 रुपये तक हो गए हैं। बढ़ती कीमतों से रोजाना बाहर भोजन करने वाले लोगों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।

रेस्टोरेंट्स में भी बढ़े मेन्यू के दाम

गैस संकट का असर सिर्फ ढाबों और रेहड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के रेस्टोरेंट्स में भी खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ गए हैं। लालपुल क्षेत्र के एक साउथ इंडियन रेस्टोरेंट में मसाला डोसा 80 रुपये से बढ़कर 100 रुपये, पाव भाजी 80 से 100 रुपये और पनीर डोसा 110 से बढ़कर 130 रुपये तक पहुंच गया है।

वहीं चाय की कीमत भी बढ़ गई है। पहले जहां एक कप चाय 10 रुपये में मिल जाती थी, अब इसकी कीमत 12 से 15 रुपये प्रति कप हो गई है।

ब्लैक में महंगे मिल रहे सिलिंडर

रेहड़ी और ढाबा संचालकों का कहना है कि बाजार में वाणिज्यिक गैस सिलिंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। मजबूरी में कई लोग घरेलू या छोटे 3 से 5 किलो वाले सिलिंडरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं कई व्यापारियों को ब्लैक में महंगे दामों पर सिलिंडर खरीदने पड़ रहे हैं।

आमतौर पर 1700 से 1800 रुपये में मिलने वाला वाणिज्यिक सिलिंडर अब 4000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। इसके अलावा छोटे सिलिंडरों में गैस भरवाने का रेट भी 100-110 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 300 रुपये प्रति किलो से अधिक हो गया है।

सिलिंडर खत्म होते ही बंद हो रही दुकानें

गैस संकट का असर छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। कई छोटे ढाबे और रेहड़ियां गैस की कमी के कारण बंद हो चुकी हैं। जो संचालक किसी तरह सिलिंडर का इंतजाम कर पा रहे हैं, वही दुकान चला पा रहे हैं।

लालपुल-कारगी रोड के वेंडिंग जोन में कई ढाबे गैस की कमी के कारण बंद पड़े हैं। कुछ संचालक मजबूरी में भट्ठी या अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग कर काम चला रहे हैं, जबकि कई लोग सिलिंडर का जुगाड़ कर किसी तरह अपना कारोबार जारी रखे हुए हैं।

व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो छोटे ढाबों और रेहड़ी कारोबारियों के सामने रोज़गार का संकट और गहरा सकता है।

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