दून-हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर बनेगा स्मार्ट और जाम-मुक्त, 73 किमी इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की तैयारी
उत्तराखंड के सबसे व्यस्त यातायात मार्गों में शामिल देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर को स्मार्ट और जाम-मुक्त बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ी योजना तैयार की है। राज्य सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कांप्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (सीएमपी-2024) की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
सरकार का लक्ष्य इस कॉरिडोर में आधुनिक और टिकाऊ यातायात व्यवस्था विकसित करना है, जिससे दैनिक यात्रियों को राहत मिले और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर हो सके।
बैठक में जानकारी दी गई कि तीनों शहरों के बीच करीब 73 किलोमीटर लंबा इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (ई-बीआरटीएस) विकसित किया जाएगा। यह प्रणाली सार्वजनिक परिवहन को तेज, पर्यावरण-अनुकूल और अधिक प्रभावी बनाएगी। इसके साथ ही हरिद्वार में पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (पीआरटी) सिस्टम और प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के लिए रोपवे कनेक्टिविटी का भी प्रस्ताव रखा गया है।
यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम (आईटीएस), आधुनिक पार्किंग प्रबंधन, स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल और नए बाईपास मार्गों का भी विकास किया जाएगा। इन व्यवस्थाओं से कॉरिडोर पर लगने वाले लंबे जाम से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएमपी के सभी प्रस्तावों को शहरों के मास्टर प्लान में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल आम यात्रियों के लिए ही नहीं बल्कि कुंभ और कांवड़ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान यातायात प्रबंधन के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी।
इसके साथ ही ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) की अवधारणा के तहत इस कॉरिडोर को देश के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना लागू होने के बाद बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान यातायात प्रबंधन में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
बैठक में मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा, निदेशक वित्त संजीव मेहता, महाप्रबंधक संजय पाठक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अवसंरचना अभियंताओं की सूचीबद्धता होगी डिजिटल
प्रदेश में भवन निर्माण कार्यों को गति देने के लिए आवास विभाग ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्ट्रक्चरल इंजीनियरों के पंजीकरण और नवीनीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए हैं।
हुडा कार्यालय में आयोजित बैठक में उन्होंने अधिकारियों को लंबित प्रस्तावों की तुरंत जांच कर प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही पूरी प्रक्रिया को आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने की बात कही गई, ताकि नक्शा स्वीकृति में होने वाली देरी को रोका जा सके और सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिले।
बैठक में डिजिटल सत्यापन प्रणाली को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया, जिससे आवेदकों को अनावश्यक जटिलताओं और देरी का सामना न करना पड़े।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रदेश में अवसंरचना विकास को नई गति मिलेगी।



