Uttarakhand: श्रमिकों के लिए नए नियमों की तैयारी, अब 10 घंटे से ज्यादा काम नहीं; न्यूनतम मजदूरी में बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य खर्च भी शामिल

उत्तराखंड में श्रमिकों के लिए बदलेगा काम का ढांचा, 10 घंटे से अधिक काम पर ओवरटाइम अनिवार्य

देहरादून। उत्तराखंड में श्रमिकों के काम के घंटे और न्यूनतम मजदूरी तय करने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने मजदूरी संहिता नियमावली 2026 का मसौदा जारी करते हुए कई महत्वपूर्ण प्रावधान प्रस्तावित किए हैं। इसके तहत अब किसी भी श्रमिक से एक दिन में अधिकतम 10 घंटे ही काम कराया जा सकेगा। इससे अधिक समय तक काम लेने पर नियोक्ता को अलग से ओवरटाइम भुगतान करना होगा।

श्रम विभाग ने इस मसौदे को सार्वजनिक करते हुए आम जनता, संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं। विभाग के अनुसार अधिसूचना जारी होने के बाद 30 दिनों के भीतर इच्छुक लोग अपने सुझाव या आपत्तियां सचिव, श्रम विभाग अथवा श्रम आयुक्त को ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं।

काम के घंटे और विश्राम के नए प्रावधान

प्रस्तावित नियमों के अनुसार कार्यस्थलों पर काम के समय को लेकर स्पष्ट मानक तय किए गए हैं।

  • किसी भी श्रमिक से एक दिन में अधिकतम 10 घंटे काम लिया जा सकेगा।

  • सप्ताह में कुल कार्य अवधि 48 घंटे से अधिक नहीं होगी।

  • लगातार छह घंटे काम करने के बाद कम से कम 30 मिनट का विश्राम देना अनिवार्य होगा।

यदि कोई श्रमिक निर्धारित समय से अधिक काम करता है तो उसे सामान्य मजदूरी से दोगुनी दर पर भुगतान करना होगा।

न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए वैज्ञानिक फार्मूला

राज्य सरकार ने पहली बार न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए वैज्ञानिक मानकों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत श्रमिकों की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मजदूरी का निर्धारण किया जाएगा।

प्रस्तावित मानकों में शामिल हैं:

  • प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2700 कैलोरी भोजन की खपत

  • एक परिवार के लिए सालाना 66 मीटर कपड़े की आवश्यकता

  • भोजन और कपड़ों पर कुल खर्च का 10 प्रतिशत आवास किराया माना जाएगा

  • इसके अतिरिक्त बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन के लिए कुल मजदूरी का 25 प्रतिशत हिस्सा जोड़ा जाएगा

सरकार का मानना है कि इन मानकों से मजदूरी निर्धारण अधिक व्यावहारिक और पारदर्शी होगा।

परिवार की परिभाषा का दायरा बढ़ा

नई नियमावली में श्रमिक के परिवार की परिभाषा को भी स्पष्ट किया गया है। इसमें शामिल होंगे:

  • पति-पत्नी

  • 21 वर्ष तक के आश्रित पुत्र

  • अविवाहित पुत्रियां

  • शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम संतान

  • आश्रित माता-पिता

महिला श्रमिकों के मामले में सास-ससुर को भी परिवार का हिस्सा माना जाएगा। इससे श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ पूरे परिवार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

श्रमिकों की नई श्रेणी: अत्यधिक कुशल

अब तक श्रमिकों को कौशल के आधार पर अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता था। नई नियमावली में चौथी श्रेणी ‘अत्यधिक कुशल’ को जोड़ा गया है।

इस श्रेणी में वे श्रमिक शामिल होंगे जिनके पास विशेष दक्षता, तकनीकी विशेषज्ञता और निर्णय लेने की क्षमता होगी। ऐसे श्रमिकों को उनकी योग्यता के अनुसार अधिक मजदूरी और बेहतर लाभ दिए जाएंगे।

सुझाव भेजने के लिए ई-मेल

श्रम विभाग ने मसौदे पर आम लोगों से सुझाव मांगे हैं। इच्छुक व्यक्ति 30 दिनों के भीतर अपने सुझाव निम्न ई-मेल पर भेज सकते हैं:

सरकार का कहना है कि प्राप्त सुझावों के आधार पर नियमों में संशोधन कर अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी, जिससे राज्य के श्रमिकों को बेहतर कार्य परिस्थितियां और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।

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