देहरादून: उत्तराखंड में पलायन की समस्या से निपटने और प्रवासियों को अपने पैतृक गांवों से जोड़ने के लिए पहली बार प्रदेश में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जाएगा। इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है और इसकी शुरुआत 24 अप्रैल को टिहरी जिले से की जाएगी। इन पंचायतों के माध्यम से उन प्रवासियों से संवाद स्थापित किया जाएगा जो अपने पैतृक गांव लौटने की इच्छा रखते हैं।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों और अन्य राज्यों में रह रहे प्रवासियों को वापस अपने गांवों में बसने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग ने यह पहल शुरू की है। पहली बार राज्य के प्रत्येक जिले में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जाएगा, जहां प्रवासी और प्रशासन के बीच सीधा संवाद होगा।
आयोग की ओर से किए गए सर्वेक्षण के अनुसार अब तक 6282 प्रवासी अपने गांव लौट चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर इस पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक प्रवासियों को गांवों से जोड़ा जा सके और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिले।
पौड़ी में हुई बैठक में बनी रूपरेखा
प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी की अध्यक्षता में पौड़ी में आयोजित बैठक में तैयार की गई। इन पंचायतों में राज्य के अन्य जिलों या बाहरी राज्यों में रहने वाले ऐसे प्रवासियों को आमंत्रित किया जाएगा जो अपने पैतृक गांव लौटने के इच्छुक हैं।
स्वरोजगार के अनुभव साझा करेंगे प्रवासी
कोविड काल के दौरान अपने गांव लौटे कई प्रवासियों ने स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को अपनाया और सफल उदाहरण पेश किए हैं। कई लोग कृषि, बागवानी, मसाला खेती, सगंध फसलें, मधुमक्खी पालन, पुष्प उत्पादन और मशरूम उत्पादन जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ प्रवासियों ने होमस्टे, होटल, रेस्टोरेंट, पशुपालन और डेयरी व्यवसाय के माध्यम से भी रोजगार के नए अवसर तैयार किए हैं।
प्रवासी पंचायतों के दौरान ऐसे सफल प्रवासी अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे अन्य लोग भी प्रेरित होकर गांवों में स्वरोजगार शुरू कर सकें।
नवंबर तक सभी जिलों में होंगे आयोजन
पलायन निवारण आयोग के अनुसार प्रवासी पंचायतों की पूरी रूपरेखा तय कर ली गई है। नवंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में इनका आयोजन किया जाएगा। पंचायतों में जिला स्तर के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे और सरकार की विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी प्रवासियों को दी जाएगी।
पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी ने बताया कि प्रवासी पंचायतों के माध्यम से प्रवासियों को गांव लौटने के लिए प्रेरित किया जाएगा और उन्हें स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी, ताकि पहाड़ों से पलायन की समस्या को कम किया जा सके।



