रुड़की: संघर्षों से लड़कर शिक्षिका रेखा ने लिखी बदलाव की मिसाल, सफीपुर स्कूल बना शिक्षा का नया मॉडल
रुड़की। सीमित संसाधनों, चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों के बीच एक शिक्षिका की मेहनत और समर्पण ने सरकारी स्कूल की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। रुड़की क्षेत्र स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय सफीपुर आज शिक्षा के एक नए मॉडल के रूप में पहचान बना चुका है। इस परिवर्तन के पीछे शिक्षिका रेखा बुडकोटी की अथक मेहनत, नवाचार और सकारात्मक सोच सबसे बड़ी ताकत साबित हुई है।
कभी संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा यह विद्यालय आज आधुनिक सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जाना जा रहा है। विद्यालय में आए इस बदलाव ने न केवल छात्रों बल्कि अभिभावकों और आसपास के स्कूलों को भी प्रेरित किया है।
चुनौतियों के बीच शुरू हुआ बदलाव का सफर
विद्यालय में स्कूल प्रभारी का कार्यभार संभालते ही शिक्षिका रेखा बुडकोटी ने यह संकल्प लिया कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शुरुआती दौर उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
स्कूल में बच्चों की पढ़ाई के प्रति कम रुचि, अभिभावकों की उदासीनता और बुनियादी संसाधनों की कमी बड़ी बाधा थीं। कई अभिभावक बच्चों को नियमित रूप से स्कूल नहीं भेजते थे, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। बावजूद इसके, उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास जारी रखे।
नवाचार और सहयोग से बदली स्कूल की तस्वीर
शिक्षिका के प्रयासों और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO) के सहयोग से विद्यालय में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। स्कूल में आधुनिक शिक्षण सुविधाएं विकसित की गईं, जिनमें शामिल हैं—
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स्मार्ट क्लास की स्थापना
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कंप्यूटर लैब की शुरुआत
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खेल मैदान और खेल उपकरण
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दीवारों पर शैक्षिक एवं प्रेरणादायक चित्रांकन
दीवारों पर बनाए गए चित्रों और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान, गणित और सामान्य ज्ञान सिखाया जाने लगा। डिजिटल संसाधनों के उपयोग से पढ़ाई को रोचक बनाया गया, जिससे बच्चों की सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
अब नियमित स्कूल पहुंच रहे छात्र
जहां पहले छात्र अनियमित रूप से विद्यालय आते थे, वहीं अब बच्चों की उपस्थिति में बड़ा सुधार देखा जा रहा है। छात्र पढ़ाई में रुचि ले रहे हैं और शैक्षणिक प्रदर्शन भी बेहतर हुआ है।
सबसे बड़ा बदलाव अभिभावकों के व्यवहार में देखने को मिला है। जो अभिभावक पहले बच्चों की पढ़ाई को लेकर उदासीन थे, अब वे स्वयं स्कूल गतिविधियों में रुचि ले रहे हैं और बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दे रहे हैं।
शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी जोर
शिक्षिका रेखा बुडकोटी ने बच्चों को केवल पाठ्य शिक्षा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें स्वच्छता अभियान, पौधारोपण और नैतिक शिक्षा जैसी गतिविधियों से भी जोड़ा। इन प्रयासों से विद्यालय परिसर साफ-सुथरा, आकर्षक और प्रेरणादायक बन गया है।
आज राजकीय प्राथमिक विद्यालय सफीपुर आसपास के विद्यालयों के लिए एक उदाहरण बन चुका है, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद समर्पण और नवाचार से शिक्षा में बड़ा बदलाव संभव हुआ है।



