उत्तराखंड: प्री-एसआईआर की समीक्षा को चुनाव आयोग सख्त, चार वरिष्ठ अफसर जिलों में तैनात; लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई

देहरादून। प्रदेश में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले चल रहे प्री-एसआईआर कार्यों की रफ्तार तेज करने के लिए चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। मतदाता मैपिंग के कार्य की समीक्षा के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने अपने चार वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे जिलों में तैनात कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी एवं बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश में मतदाता मैपिंग का कार्य लगातार जारी है और अब तक 81 प्रतिशत से अधिक प्रगति दर्ज की जा चुकी है। हालांकि मैदानी जिलों में कार्य की गति अपेक्षाकृत धीमी बताई जा रही है। इसी को देखते हुए आयोग ने निगरानी तंत्र को और सशक्त बनाने का निर्णय लिया है।

चार वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई जिलों की जिम्मेदारी

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने प्री-एसआईआर की समीक्षा के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है।

डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मैपिंग कार्य को गंभीरता से लिया जा रहा है।

  • अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे को देहरादून, हरिद्वार और पौड़ी जिलों की जिम्मेदारी दी गई है।

  • संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र को पिथौरागढ़, बागेश्वर और अल्मोड़ा का दायित्व सौंपा गया है।

  • उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग और चमोली की निगरानी करेंगे।

  • सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास को ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और चंपावत जिलों की जिम्मेदारी दी गई है।

इन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिलों में जाकर मैपिंग कार्य की प्रगति की समीक्षा करें और जहां भी आवश्यक हो, सुधारात्मक कदम तत्काल उठाएं।

जिलाधिकारियों को रोजाना रिपोर्ट लेने के निर्देश

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे प्री-एसआईआर कार्यों की प्रतिदिन समीक्षा करें। जिन बूथों पर बीएलओ को तकनीकी या मानव संसाधन से संबंधित कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, वहां अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके साथ ही सभी ईआरओ (निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी) को भी अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

अप्रैल में शुरू होगा एसआईआर

प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अप्रैल माह से प्रारंभ होना प्रस्तावित है। इससे पूर्व प्री-एसआईआर के तहत हो रही मतदाता मैपिंग को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आगामी पुनरीक्षण प्रक्रिया में किसी प्रकार की दिक्कत न आए।

डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि मतदाता सूची की शुद्धता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो भी अधिकारी या बीएलओ कार्य में लापरवाही बरतते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सीधे प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि कुछ बीएलओ को कार्य में सुस्ती बरतने पर चेतावनी भी जारी की गई है।

चुनाव आयोग के इस सख्त रुख से स्पष्ट है कि प्रदेश में आगामी एसआईआर को लेकर प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय है और मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।

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