देहरादून।
उत्तराखंड में नौ मार्च से प्रस्तावित विधानसभा सत्र को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार सदन में जनहित के मुद्दों पर जवाब देने से लगातार बचती रही है। उन्होंने कहा कि बीते पांच वर्षों में एक बार भी प्रश्नकाल के लिए सोमवार का दिन निर्धारित नहीं किया गया, जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए गोदियाल ने कहा कि नौ से 13 मार्च तक ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में स्थित उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र आयोजित किया जा रहा है। लेकिन सरकार ने इसके लिए केवल पांच दिन का समय तय किया है, जो पूरी तरह अपर्याप्त है। कांग्रेस विधायकों की मांग है कि सत्र कम से कम एक माह तक चलना चाहिए, ताकि राज्य के सभी 70 विधायक अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रभावी ढंग से उठा सकें।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों द्वारा उठाए जाने वाले जन मुद्दों पर सरकार चर्चा से बचती नजर आती है। प्रश्नकाल लोकतंत्र की आत्मा होता है, लेकिन सरकार ने जानबूझकर इसे सीमित करने की नीति अपनाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोमवार को प्रश्नकाल न रखे जाने का मुख्य कारण यह है कि उस दिन मुख्यमंत्री सदन में जवाब देने के लिए उपलब्ध नहीं रहते।
गोदियाल ने स्पष्ट किया कि प्रश्नकाल कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता की आवाज को सीधे सरकार तक पहुंचाने का सबसे सशक्त माध्यम है। सदन में पूछे गए सवालों से ही सरकार की नीतियों, फैसलों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। यदि सरकार संवाद से दूरी बनाए रखेगी, तो जनता के मन में अविश्वास की भावना और गहरी होगी।
उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस पार्टी सदन के भीतर और सदन के बाहर, दोनों ही स्तरों पर जनहित के मुद्दों को पूरी मजबूती से उठाती रहेगी और सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने का हर संभव प्रयास करेगी।



