देहरादून।
आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। खास बात यह है कि इस दिशा में बेटियां भी किसी से पीछे नहीं हैं। राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई युवा आपदा मित्र योजना के तहत अब तक कुल 1826 युवाओं को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें 874 बेटियां शामिल हैं, जबकि 952 युवक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
राज्य में भूकंप, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका को देखते हुए, आपदा से निपटने की तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में सितंबर-2025 से युवा आपदा मित्र योजना की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य आपदा के समय प्रभावित लोगों को त्वरित और प्रभावी सहायता उपलब्ध कराना है।
4310 युवाओं को दिया जाना है प्रशिक्षण
योजना के तहत एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड और ‘मेरा युवा भारत’ से जुड़े कुल 4310 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाना प्रस्तावित है। इनमें से अभी तक 1826 युवाओं का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। आंकड़े बताते हैं कि इस अभियान में बेटियों की भागीदारी लगभग बेटों के बराबर है, जो सामाजिक रूप से एक सकारात्मक संदेश देता है।
क्या-क्या सिखाया जा रहा है प्रशिक्षण में
युवा आपदा मित्र योजना के अंतर्गत युवाओं को—
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आपदा की समझ और जोखिम की पहचान,
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प्राथमिक उपचार और घायलों की मदद,
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खोज एवं बचाव (Search & Rescue) तकनीक,
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राहत शिविरों का प्रबंधन,
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आपदा के बाद समन्वय और संचार व्यवस्था
जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक और सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
एनसीसी कैंप और रेस्क्यू एजेंसियों में हो रहा प्रशिक्षण
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एनसीसी कैंपों, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के परिसरों में आयोजित किए जा रहे हैं। इससे युवाओं को पेशेवर रेस्क्यू टीमों के साथ काम करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इन प्रशिक्षित युवाओं की मदद से आपदा के समय स्थानीय स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और अधिक मजबूत होगा, जिससे जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकेगा।



