महाशिवरात्रि 2026: वर्षों बाद दुर्लभ शुभ योगों का महासंयोग, चार प्रहरों में शिव पूजन से मिलेगा विशेष फल

महाशिवरात्रि 2026 इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत विशेष रहने वाली है। वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब एक साथ कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। 15 फरवरी की शाम से महाशिवरात्रि का पावन योग प्रारंभ होगा, जो 16 फरवरी की शाम तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होगी।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि पर कुंभ राशि में बुधादित्य योग, शुक्रादित्य योग, लक्ष्मी नारायण योग और चतुर्ग्रही योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, ध्रुव योग और व्यतिपात योग भी इस दिन को और अधिक पुण्यदायी बना रहे हैं। ग्रह-नक्षत्रों की यह अनुकूल स्थिति साधना, व्रत और पूजन के लिए अत्यंत श्रेष्ठ मानी जा रही है।

शिव की त्रिगुणी उपासना का महत्व

नारायण ज्योतिष संस्थान के आचार्य विकास जोशी के अनुसार, भगवान शिव की सृष्टि त्रिगुणी है। इसी आधार पर शिव पूजन के भी तीन स्वरूप बताए गए हैं—सात्विक, राजसिक और तामसिक

  • सात्विक पूजा में दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, पुष्प, फल और मिठाई अर्पित की जाती है।

  • राजसिक पूजा में भांग, धतूरा, रुद्राक्ष और कमल पुष्प का प्रयोग होता है।

  • तामसिक पूजा विशेष रूप से अघोर साधना में की जाती है, जिसमें भस्म से आरती और भस्म श्रृंगार द्वारा भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि भक्त जिस भाव से शिव की उपासना करता है, भगवान शिव उसे उसी के अनुरूप फल प्रदान करते हैं। महाशिवरात्रि पर की गई हर प्रकार की पूजा विशेष पुण्य फल देती है।

व्रत और पूजन की तिथि

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी, रविवार को शाम 5:04 बजे से प्रारंभ होकर 16 फरवरी, सोमवार को शाम 5:34 बजे तक रहेगी। चतुर्दशी तिथि रात्रि में पड़ने के कारण 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाएगा।

चार प्रहरों में शिव पूजन का विशेष महत्व

शास्त्रों में महाशिवरात्रि की रात्रि को चार प्रहरों में बांटकर शिव पूजन करने का विशेष महत्व बताया गया है—

  • प्रथम प्रहर: 15 फरवरी शाम 6:11 बजे से रात 9:22 बजे तक

  • द्वितीय प्रहर: 15 फरवरी रात 9:23 बजे से 16 फरवरी रात 12:34 बजे तक

  • तृतीय प्रहर: 16 फरवरी रात 12:35 बजे से सुबह 3:46 बजे तक

  • चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी सुबह 3:46 बजे से सुबह 6:59 बजे तक

इसके अलावा निशीथ काल पूजा 16 फरवरी की रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक की जा सकती है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है।

महाशिवरात्रि पर विशेष उपाय

  • धन संबंधी कष्टों से मुक्ति के लिए 5 बिल्वपत्रों पर “राम” लिखकर भगवान शिव को अर्पित करें।

  • पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए 3 बिल्वपत्रों पर केसर और चंदन से “ॐ नमः शिवाय” लिखकर अर्पित करें।

शिव अभिषेक का महत्व

  • दूध से अभिषेक: मन की शांति के लिए

  • गन्ने के रस से अभिषेक: धन प्राप्ति के लिए

  • सरसों के तेल से अभिषेक: शत्रु नाश के लिए

  • गिलोय के रस से अभिषेक: उत्तम स्वास्थ्य के लिए

  • गंगाजल से अभिषेक: शिव भक्ति और कृपा प्राप्ति के लिए

महाशिवरात्रि की यह पावन रात्रि केवल व्रत और पूजन का अवसर नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ संयोग है।

Previous articleउत्तराखंड पहुंचे जेपी नड्डा, जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर सीएम धामी ने किया स्वागत; विधानसभा चुनाव रणनीति पर आज कोर कमेटी की अहम बैठक
Next articleदेहरादून में बढ़ते अपराधों पर कांग्रेस का हल्ला बोल, पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन कर कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल