उत्तराखंड में चंदन की खेती से महकेगी किसानों की आर्थिकी, शोध में मिले उत्साहजनक परिणाम

उत्तराखंड में किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी और सुगंधित पहल सामने आई है। राज्य सगंध पौध केंद्र द्वारा पिछले एक दशक से चंदन की खेती पर किए जा रहे शोध में उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। शोध के दौरान चंदन की लकड़ी और तेल की गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरी है, जिससे प्रदेश में व्यावसायिक स्तर पर चंदन की खेती की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

सगंध पौध केंद्र ने किसानों की आर्थिकी को सशक्त बनाने के उद्देश्य से देहरादून जिले के रानीपोखरी क्लस्टर में ट्रायल के तौर पर करीब 1500 चंदन के पौधे लगाए थे। लंबे समय तक चले इस प्रयोग में चंदन के पौधों की वृद्धि संतोषजनक पाई गई। साथ ही, तैयार हुई लकड़ी और उससे प्राप्त तेल की गुणवत्ता भी उत्कृष्ट रही।

केंद्र की ओर से चंदन की लकड़ी और तेल की जांच सेलाकुई स्थित प्रयोगशाला में कराई गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ट्रायल में उगाए गए चंदन की गुणवत्ता प्राकृतिक रूप से उगने वाले चंदन के समान है। इससे यह साबित हुआ कि उत्तराखंड की जलवायु और मिट्टी चंदन की खेती के लिए अनुकूल है।

बाजार में चंदन के तेल की ऊंची कीमत

सगंध पौध केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान बाजार में चंदन के तेल की कीमत 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक है, जबकि चंदन की लकड़ी 3500 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही है। यदि कोई किसान एक हेक्टेयर भूमि पर चंदन की खेती करता है, तो उसे लकड़ी से लगभग तीन करोड़ रुपये और तेल से करीब 4.4 करोड़ रुपये तक की आय हो सकती है। यह आंकड़े चंदन की खेती को किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी विकल्प बनाते हैं।

सुगंधित और धार्मिक उत्पादों में होता है उपयोग

चंदन की लकड़ी और तेल का उपयोग परफ्यूम, साबुन और अन्य सुगंधित उत्पादों के निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसके अलावा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी चंदन का विशेष महत्व है। हवन, तिलक, पूजा-पाठ के साथ-साथ चंदन की लकड़ी से माला और मूर्तियां भी बनाई जाती हैं। चंदन की सुगंध मानसिक शांति और तनाव मुक्ति प्रदान करने के लिए जानी जाती है।

प्रदेशभर में बनेगी कार्ययोजना

सगंध पौध केंद्र के निदेशक नृपेंद्र चौहान ने बताया कि शोध में रानीपोखरी क्षेत्र में चंदन की गुणवत्ता बेहतरीन पाई गई है। आने वाले समय में प्रदेश के उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां चंदन की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। इसके लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक किसान चंदन की खेती अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें।

चंदन की खुशबू अब केवल धार्मिक और औषधीय महत्व तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उत्तराखंड के किसानों की समृद्धि की पहचान भी बनेगी।

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