हरिद्वार।
वसंत पंचमी के पावन पर्व पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। गंगा स्नान के लिए तड़के सुबह से ही हरकी पैड़ी सहित विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देश-प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे भक्तों ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
गंगा स्नान पर्व के अवसर पर श्रद्धालु देव डोलियां लेकर भी घाटों पर पहुंचे। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और जयकारों के बीच देव डोलियों को भी गंगा स्नान कराया गया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण बना रहा। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे स्नानार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
🌼 वसंत पंचमी पर कर्णछेदन का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में कर्णछेदन को एक महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वसंत पंचमी का दिन कर्णछेदन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य उत्तरायण में होते हैं, जिसे देवताओं का काल कहा जाता है। मान्यता है कि उत्तरायण में किए गए संस्कार शुभ फलदायी और दीर्घकालीन प्रभाव देने वाले होते हैं, इसी कारण वसंत पंचमी पर कर्णछेदन की परंपरा तेजी से बढ़ रही है।
पंडित मोहन गैरोला के अनुसार वसंत पंचमी माता सरस्वती को समर्पित दिन है। इस दिन विद्या आरंभ और कर्णछेदन कराने से बालक की बुद्धि, विद्या और वाणी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शास्त्रों में माना गया है कि कर्णछेदन से कानों की विशेष नाड़ियां सक्रिय होती हैं, जिससे मस्तिष्क की ग्रहण क्षमता बढ़ती है। वसंत पंचमी स्वयं सिद्ध मुहूर्त होती है, इसलिए इस दिन किसी अलग शुभ मुहूर्त की आवश्यकता नहीं पड़ती।
🪔 परंपरा में बदलाव, आस्था कायम
पूर्व में यह संस्कार घरों में हवन-पूजन के साथ उत्सव की तरह मनाया जाता था और बाद में मिष्ठान वितरण किया जाता था। समय के साथ इसका स्वरूप सीमित भले हुआ हो, लेकिन आस्था और परंपरा आज भी उतनी ही मजबूत है। पंडित अभिषेक शर्मा का कहना है कि कर्णछेदन से तेजस्विता बढ़ती है और राहु-केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। शास्त्रों के अनुसार सोने या चांदी के कुंडल धारण करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
💍 सोना महंगा, चांदी को मिल रही प्राथमिकता
स्थानीय ज्वेलर्स अजय बताते हैं कि पहले वसंत पंचमी पर कर्णछेदन के लिए कम लोग आते थे, लेकिन अब हर साल संख्या बढ़ रही है। सोने के बढ़ते दामों के कारण अब अधिकांश अभिभावक चांदी के कुंडल या तार को प्राथमिकता दे रहे हैं।
श्रद्धालु सुनीता यादव का कहना है कि उन्होंने सोने के बजाय चांदी का चयन किया है, जबकि आरोही बिष्ट ने बताया कि वे वसंत पंचमी की पूजा के बाद अपनी तीन माह की बेटी का कर्णछेदन कराएंगी और फिर मिठाई बांटी जाएगी।
कुल मिलाकर, वसंत पंचमी पर हरिद्वार में गंगा स्नान और कर्णछेदन संस्कार ने आस्था, परंपरा और श्रद्धा का अनुपम संगम प्रस्तुत किया।



