उत्तराखंड में शुरू हुई डॉल्फिन एंबुलेंस सेवा, एक्सरे-ईसीजी से लैस वाहन से रेस्क्यू और इलाज होगा और प्रभावी

उत्तराखंड और उत्तर भारत में डॉल्फिन समेत जलीय जीवों के संरक्षण और रेस्क्यू को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम पहल की गई है। अब डॉल्फिन के रेस्क्यू और प्राथमिक इलाज के लिए विशेष रूप से तैयार की गई अत्याधुनिक डॉल्फिन एंबुलेंस को मैदान में उतारा गया है। यह एंबुलेंस एक्सरे, ईसीजी और ब्लड एनालिसिस जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस है, जिससे रेस्क्यू किए गए डॉल्फिन के स्वास्थ्य की तुरंत जांच और उपचार संभव हो सकेगा।

भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) परिसर से मंगलवार को इस डॉल्फिन एंबुलेंस को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह एंबुलेंस टीएस फाउंडेशन इंडिया संस्था की पहल पर तैयार की गई है, जो लंबे समय से डॉल्फिन, घड़ियाल समेत अन्य जलीय जीवों के संरक्षण और अध्ययन के क्षेत्र में कार्य कर रही है।

टीएस फाउंडेशन इंडिया की बायोलॉजिस्ट सुप्रिया दत्ता ने बताया कि संस्था वर्ष 2013 से अब तक उत्तर प्रदेश में 41 डॉल्फिन का सफल रेस्क्यू कर चुकी है। अब तक यह कार्य ट्रकों के माध्यम से किया जाता था, जिसमें चिकित्सा सुविधाओं की सीमाएं थीं। नई डॉल्फिन एंबुलेंस के आने से रेस्क्यू प्रक्रिया न केवल तेज होगी, बल्कि वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से डॉल्फिन की देखभाल भी की जा सकेगी।

उन्होंने बताया कि इस विशेष एंबुलेंस में डॉल्फिन को सुरक्षित रखने के लिए स्ट्रेचर की व्यवस्था की गई है। चूंकि डॉल्फिन जलीय जीव है, इसलिए उसके शरीर को नम रखने के लिए 500 लीटर क्षमता का पानी टैंक और शॉवर सिस्टम लगाया गया है, जिससे रेस्क्यू के दौरान और परिवहन के समय उस पर लगातार पानी का छिड़काव किया जा सके।

इसके अलावा एंबुलेंस में ईसीजी, एक्सरे, ब्लड एनालिसिस जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं भी मौजूद हैं। जरूरत पड़ने पर मौके पर ही प्राथमिक इलाज के लिए पशु चिकित्सक भी तैनात रहेंगे। इससे गंभीर रूप से घायल या कमजोर डॉल्फिन को तत्काल चिकित्सकीय सहायता मिल सकेगी।

भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. विपल मौर्य ने बताया कि उत्तर प्रदेश में कई बार नदियों से भटककर डॉल्फिन नहरों में पहुंच जाती हैं। पानी का स्तर कम होने पर वे वहां फंस जाती हैं, जिससे उनके जीवन पर संकट आ जाता है। ऐसे मामलों में समय पर रेस्क्यू बेहद जरूरी होता है। डॉल्फिन एंबुलेंस जैसी सुविधा से अब ऐसे रेस्क्यू अभियानों को और अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम दिया जा सकेगा।

बताया गया कि यह डॉल्फिन के लिए देश की पहली विशेष एंबुलेंस है, जो जलीय जीवों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे न सिर्फ डॉल्फिन के जीवन को बचाने में मदद मिलेगी, बल्कि उनके संरक्षण और अध्ययन को भी नई मजबूती मिलेगी।

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