तेहरान।
ईरान में सत्ता के खिलाफ भड़के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों ने गंभीर रूप ले लिया है। बीते करीब दो सप्ताह से जारी इन सरकार विरोधी आंदोलनों के दौरान हुई हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 538 लोगों की मौत हो चुकी है। मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं का दावा है कि वास्तविक मृतक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, लेकिन इंटरनेट और फोन सेवाओं पर लगी पाबंदियों के कारण हालात की स्वतंत्र पुष्टि करना बेहद मुश्किल हो गया है।
कार्यकर्ताओं के अनुसार, प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में अब तक कम से कम 10,670 लोगों को हिरासत में लिया गया है। कई शहरों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती है और प्रदर्शनकारियों पर सख्ती लगातार बढ़ाई जा रही है। देशभर में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
मरने वालों के सही आंकड़े सार्वजनिक नहीं कर रही सरकार
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी (HRANA) के मुताबिक, मृतकों में 450 से अधिक प्रदर्शनकारी और कम से कम 41 सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि लगातार हो रही गिरफ्तारियों और सूचना पर नियंत्रण के चलते हताहतों की संख्या में और बढ़ोतरी की आशंका है। हालांकि, ईरान सरकार की ओर से अब तक प्रदर्शनों में मारे गए लोगों का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।
अमेरिका-ईरान तनाव भी चरम पर
इसी बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और गहराता नजर आ रहा है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो अमेरिकी और इस्राइली सैनिकों को निशाना बनाया जाएगा। संसद में यह बयान उस समय आया, जब सांसद नारेबाजी करते हुए आसन के पास पहुंच गए और “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाए।
विदेश में मौजूद विश्लेषकों और मानवाधिकार संगठनों ने आशंका जताई है कि सूचनाओं पर पाबंदी के कारण सुरक्षा बलों की सख्ती और बढ़ सकती है, जिससे हालात और बिगड़ने का खतरा है।
ट्रंप ने जताया प्रदर्शनकारियों का समर्थन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए ईरान में प्रदर्शन कर रहे लोगों के प्रति समर्थन जताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर मदद के लिए तैयार है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप को ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई से जुड़े विकल्पों की जानकारी दी गई है, हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने भी संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने बयानों को लेकर गंभीर रहते हैं।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन का बयान
दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि सरकार प्रदर्शनकारियों की बात सुनने को तैयार है। उन्होंने माना कि लोगों की अपनी चिंताएं हैं और सरकार का कर्तव्य है कि उनसे संवाद कर समाधान निकाला जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ दंगाई तत्व पूरे समाज को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा,
“लोगों की चिंताएं हैं, हमें उनके साथ बैठकर समाधान निकालना चाहिए। लेकिन इससे भी बड़ा कर्तव्य यह है कि हम किसी भी समूह को पूरे समाज को तबाह करने की अनुमति न दें।”
फिलहाल, ईरान में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।



