राष्ट्रीय प्रवासी दिवस: गांव लौटे प्रवासियों ने बदली तस्वीर, स्वरोजगार से जगा रहे हैं आत्मनिर्भर उत्तराखंड की उम्मीद

राष्ट्रीय प्रवासी दिवस के अवसर पर उत्तराखंड में रिवर्स पलायन की सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में कभी गांवों से देश-विदेश गए प्रवासी अब अपने पैतृक गांव लौटकर कामयाबी की नई कहानी लिख रहे हैं। बीते पांच वर्षों में 27 देशों से लौटे 169 प्रवासी उत्तराखंडी न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि गांवों में स्वरोजगार के जरिए अन्य लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण बने हैं।

उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की रिवर्स पलायन रिपोर्ट-2025 के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के 13 जिलों में कुल 6282 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। इनमें 169 प्रवासी विदेशों से, 4769 देश के अन्य राज्यों से और 1127 अन्य जिलों से वापस आए हैं। यह आंकड़े प्रदेश सरकार के रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने वाले प्रयासों के सकारात्मक परिणाम दर्शाते हैं।

विदेशों से लौटने वाले प्रवासियों में चीन, दुबई, ओमान, भूटान, जांबिया, सिंगापुर, सऊदी अरब, मॉरीशस, कैलिफोर्निया, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान, कतर, नेपाल, कुवैत, कीनिया, मालदीप, हांगकांग, दक्षिण अफ्रीका, थाइलैंड, पोलैंड, रूस, तंजानिया, नाइजीरिया, अबूधाबी सहित कई देशों से आए लोग शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या टिहरी जिले के प्रवासियों की है।

गांव लौटे प्रवासियों के पास रोजगार और कारोबार का पूर्व अनुभव था। उन्होंने राज्य सरकार की विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं का लाभ उठाकर अपने अनुभव के आधार पर आर्थिक गतिविधियां शुरू कीं। रिपोर्ट के अनुसार, रिवर्स पलायन करने वाले प्रवासियों में से

  • 39 प्रतिशत ने कृषि और बागवानी क्षेत्र में,

  • 21 प्रतिशत ने पर्यटन गतिविधियों और होम-स्टे,

  • 18 प्रतिशत ने पशुपालन,

  • जबकि 6 प्रतिशत ने दुकान, रेस्टोरेंट और मसाला उद्योग जैसे व्यवसाय शुरू किए हैं।

इन प्रयासों से न केवल उनकी आजीविका मजबूत हुई है, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। इससे अन्य ग्रामीणों में भी गांव में रहकर कुछ कर दिखाने की भावना मजबूत हुई है।

हर जिले में होगा प्रवासी पंचायत का आयोजन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रिवर्स पलायन को और गति देने के उद्देश्य से इस वर्ष राज्य के हर जिले में प्रवासी पंचायत आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग इन पंचायतों के आयोजन के लिए विस्तृत योजना तैयार कर रहा है। इन पंचायतों में गांव लौटे प्रवासियों की सफल कहानियों के साथ-साथ उनकी समस्याओं और सुझावों पर भी चर्चा की जाएगी, ताकि नीतियों को और प्रभावी बनाया जा सके।

उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस.एस. नेगी ने कहा कि रिवर्स पलायन कर गांव लौटे प्रवासियों के अनुभवों का राज्य को व्यापक लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तरकाशी जैसे जिलों में प्रवासी मोटे अनाजों की ऑनलाइन मार्केटिंग कर रहे हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है। आने वाले समय में रिवर्स पलायन को और अधिक प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे उत्तराखंड के गांव आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ सकें।

Previous articleUttarakhand: देहरादून विकास कार्यों की समीक्षा में सीएम धामी सख्त, दस्तावेज सत्यापन, अतिक्रमण हटाने और फर्जी कार्ड निरस्त करने के निर्देश
Next articleUttarakhand Weather Alert: दून समेत छह जिलों में घने कोहरे का येलो अलर्ट, 14 जनवरी तक बारिश-बर्फबारी के आसार नहीं