देहरादून।
उत्तराखंड के न्यायालयों में न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब प्रदेश के न्यायालयों में केस की मोटी-मोटी हार्ड फाइलों के बजाय डिजिटल फाइल देखने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए शासन की ओर से बजट जारी कर दिया गया है और जल्द ही ई-निरीक्षण (E-Inspection) की व्यवस्था शुरू होने जा रही है।
अब तक अधिवक्ताओं, वादी और प्रतिवादियों को अपने मामलों से संबंधित दस्तावेज देखने के लिए रिकॉर्ड रूम से हार्ड फाइल मंगवानी पड़ती थी। हर तारीख पर केस की फाइलें निकलवाना, उन्हें संभालना और पढ़ना एक बड़ी चुनौती बन चुका था। जैसे-जैसे मुकदमा आगे बढ़ता था, फाइलें और अधिक भारी और जटिल हो जाती थीं। इसी समस्या को देखते हुए न्यायालयों में न्यायिक अभिलेखों को डिजिटल रूप में परिवर्तित किया जा रहा है।
प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों में जल्द ही न्यायिक रिकॉर्ड के ई-निरीक्षण की सुविधा शुरू की जाएगी। इसके लिए प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि परामर्शी प्रशांत जोशी की ओर से उच्च न्यायालय नैनीताल के महानिबंधक को 38 लाख 50 हजार रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि जिला न्यायालयों में ज्यूडिशियल रिकॉर्ड के डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया पहले से ही जारी है।
22 कियोस्क मशीनें होंगी स्थापित
इस बजट के तहत प्रदेशभर के जिला न्यायालयों में कुल 22 कियोस्क मशीनें लगाई जाएंगी। जिन जिलों में मुकदमों की संख्या अधिक है, जैसे देहरादून, वहां आवश्यकता के अनुसार ज्यादा मशीनें स्थापित की जाएंगी, जबकि अन्य जिलों में जरूरत के हिसाब से कियोस्क लगाए जाएंगे। इन मशीनों के माध्यम से अधिवक्ता, वादी और प्रतिवादी अपने केस नंबर के जरिए संबंधित फाइल को डिजिटल रूप में देख सकेंगे।
सरकार की योजना भविष्य में केस की सत्यापित प्रतियां भी डिजिटल फॉर्म में उपलब्ध कराने की है। इससे न केवल न्यायालय की कार्यप्रणाली आसान होगी, बल्कि अधिवक्ताओं और पक्षकारों का समय भी बचेगा और अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी।
डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा पर भी जोर
न्यायालयों के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने के साथ-साथ सरकार इसकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के आधार पर इस योजना के लिए बजट जारी किया गया है। उद्देश्य यह है कि सभी न्यायिक अभिलेख साइबर हमलों से पूरी तरह सुरक्षित रहें।
इसके अलावा, जो भी हार्डवेयर और उपकरण खरीदे जाएंगे, उनके टेंडर प्रक्रिया में यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि वे बाय-बैक मोड या ई-वेस्ट टेक बैंक सेवा से जुड़े हों। इससे ई-वेस्ट और ई-प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, न्यायालयों में डिजिटल फाइल और ई-निरीक्षण की यह पहल न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक, तेज और अधिक सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



