समुद्र में भारत की बढ़ी ताकत: नौसेना को मिली ब्रह्मोस से लैस स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरि’, आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग

समुद्र में भारत की बढ़ी ताकत: नौसेना को मिली ब्रह्मोस से लैस स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरि’, आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग

भारतीय नौसेना की शक्ति में एक और आधुनिक और घातक हथियार जुड़ गया है। प्रोजेक्ट-17ए के तहत निर्मित और नीलगिरि श्रेणी की चौथी स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरि’ को मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड (एमडीएल) ने 28 नवंबर को मुंबई में भारतीय नौसेना को औपचारिक रूप से सौंप दिया।
रक्षा मंत्रालय ने इस उपलब्धि को युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

पुरानी ‘तारागिरि’ का आधुनिक अवतार

नई ‘तारागिरि’ उसी नाम के पुराने युद्धपोत का उन्नत संस्करण है, जिसने 1980 से 2013 तक पूरे 33 वर्षों तक नौसेना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आधुनिक ‘तारागिरि’ को उन्नत स्टेल्थ तकनीक, बेहतर मारक क्षमता, अत्याधुनिक सेंसर और मजबूत सर्वाइवेबिलिटी फीचर्स के साथ तैयार किया गया है।

उन्नत तकनीक से लैस, भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, प्रोजेक्ट 17-ए के तहत तैयार किए जा रहे सभी बहुउद्देश्यीय युद्धपोतों को मौजूदा एवं भविष्य की समुद्री चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है।
‘तारागिरि’ में पिछली शिवालिक क्लास (P-17) की तुलना में कई अत्याधुनिक तकनीकी अपग्रेड शामिल हैं।

दमदार हथियार प्रणाली: ब्रह्मोस से लेकर एमआरएसएएम तक

तारागिरि में अत्याधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल

  • एमएफ-स्टार (MF-STAR) रडार सिस्टम

  • एमआरएसएएम (MRSAM) एयर डिफेंस सिस्टम

  • 76 मिमी सुपर रैपिड गन माउंट

  • 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम

  • पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो सिस्टम

यह संयोजन तारागिरि को सतह, हवा और पनडुब्बी—तीनों तरह के युद्धों में सक्षम बनाता है।

समय से पहले निर्माण, प्रोजेक्ट में तेजी

पिछले 11 महीनों में नौसेना को यह प्रोजेक्ट 17-ए का चौथा युद्धपोत मिल चुका है।
पहले दो जहाजों के अनुभव ने निर्माण समय को काफी कम किया, जिसके चलते ‘तारागिरि’ को सिर्फ 81 महीनों में तैयार कर लिया गया, जबकि पहले जहाज ‘निलगिरि’ के निर्माण में 93 महीने लगे थे।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, प्रोजेक्ट के शेष तीन जहाज अगस्त 2026 तक चरणबद्ध तरीके से नौसेना को सौंप दिए जाएंगे

आत्मनिर्भर भारत का मजबूत उदाहरण

प्रोजेक्ट 17-ए में 75% स्वदेशी हिस्सेदारी है।
इस परियोजना से—

  • 200 से अधिक MSMEs जुड़े,

  • 4,000 लोगों को सीधा,

  • और 10,000 से अधिक लोगों को परोक्ष रोजगार मिला है।

‘तारागिरि’ की खासियत: दमदार गति, मजबूत इंजन और विशाल क्षमता

युद्धपोत ‘तारागिरि’ पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन पर आधारित है, जिसे भारतीय नौसेना के ब्यूरो ऑफ नेवल डिजाइन ने तैयार किया है।

मुख्य विशेषताएं—

  • वजन: 3510 टन

  • लंबाई: 149 मीटर

  • चौड़ाई: 17.8 मीटर

  • कंपन: दो गैस टर्बाइन + दो मुख्य डीजल इंजन

  • अधिकतम गति: 28 नॉट (लगभग 52–59 किमी/घंटा)

  • डिस्प्लेसमेंट: 6670 टन

  • क्रू क्षमता: 35 अधिकारी + 150 नौसैनिक

यह युद्धपोत समुद्र में लंबी दूरी तक संचालन, निगरानी, युद्धक कार्रवाई और पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से सक्षम है।

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