लोकल वायरलेस इंटरनेट नेटवर्क से जुड़ा यमुनोत्री धाम

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आइकॉनिक प्लेस घोषित होने के बाद यमुनोत्री धाम जिला मुख्यालय व देहरादून में सचिवालय से भी सीधे जुड़ गया है। अब जानकीचट्टी से लेकर यमुनोत्री तक प्रशासन यात्रा की निगरानी कर सकेगा।

साथ ही यह सिस्टम यात्रा प्रबंधन, आपदा प्रबंधन व स्वच्छता प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण होगा। केंद्र सरकार ने बीती फरवरी में यमुनोत्री धाम को आइकॉनिक प्लेस घोषित किया था। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि जानकीचट्टी से लेकर यमुनोत्री धाम तक लाइव सिस्टम काम करने लगा है। इसका विधिवत उद्घाटन जुलाई मध्य में प्रस्तावित है।

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रविवार को पत्रकारों से बातचीत में जिलाधिकारी डॉ. चौहान ने कहा कि यमुनोत्री धाम में केदारनाथ की तर्ज पर लोकल वायरलेस इंटरनेट नेटवर्क तैयार किया गया है।

इसके तहत सचिवालय, जिला मुख्यालय व तहसील मुख्यालय में बैठक कर अधिकारी यमुनोत्री धाम की लाइव मॉनीटरिंग कर सकते हैं। साथ ही जिला प्रशासन भी आपदाजन्य परिस्थितियों में यात्रियों सुरक्षा पर नजर रख सकेगा।

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विदित हो कि देश के 20 स्वच्छ आइकॉनिक प्लेस में उत्तराखंड के गंगोत्री, यमुनोत्री व बैजनाथ धाम भी शामिल हैं। यमुनोत्री धाम में सेटेलाइट के जरिए बीएसएनएल की टू-जी सेवा चल रही है, लेकिन मौसम बिगडऩे पर वह भी खराब हो जाती है।

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जानकीचट्टी से लेकर यमुनोत्री तक पैदल मार्ग पर भी कहीं संचार सेवा उपलब्ध नहीं है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने आइकॉनिक प्लेस के काम में संचार सेवा को सुदृढ़ करना भी शामिल किया है।

गेल कंपनी की सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी) मद की 72 लाख की धनराशि से यमुनोत्री धाम में लोकल वायरलेस इंटरनेट नेटवर्क तैयार किया गया।

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यह नेटवर्क तहसील, जिला मुख्यालय व सचिवालय के स्वान (स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क) केंद्रों से जुड़ा है। इससे भीड़ को नियंत्रित करने, घोड़ा-खच्चरों के संचालन पर निगरानी रखने और निर्माण कार्यों की मॉनीटरिंग में मदद मिलेगी।