पहाड़ चढ़ने को डॉक्टर तैयार नहीं, डोली के सहारे अब भी अस्पताल आते हैं मरीज

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स्वास्थ्य सुविधाएं दुरुस्त करने के दावे बहुत हुए और हो रहे हैं। सरकार डाॅक्टरों की नियुक्ति की बात तो करती है, जिसमें कुछ हद तक सफलता भी मिली। पर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए इतना काफी नहीं है। डाॅक्टर पहाड़ चढऩे को तैयार नहीं हैं। जहां चढ़े भी हैं, वहां पर इलाज के लिए मूलभूत सुविधाएं तक नहीं। कोरोनाकाल में हर अस्पताल में वेंटीलेटर तो सजा दिए गए, लेकिन स्पेशलिस्ट के अभाव में धूल फांक रहे हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी मरीज डोली के सहारे हैं। जहां हमेशा जान का खतरा रहता है। चार साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही भाजपा सरकार के सामने अब भी स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने की बड़ी चुनौती है।

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सरकार बनते ही किए थे ये दावे

  • 23 लाख परिवारों के लिए अटल आयुष्मान योजना का लाभ मिलेगा
  • दूरस्थ क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन की सुविधाएं शुरू की जाएंगी
  • सरकारी अस्पतालों को पीपीपी मोड में संचालित किया जाएगा
  • हर गांव में 10 किलोमीटर के दायरे में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी
  • 13 जिलों में ट्रामा सेंटर, ब्लड बैंक व आइसीयू स्थापित किया जाएगा
  • मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जाएगी
  • कोई भी अस्पताल बिना डाक्टर के नहीं रहेगा

दावों की ये है जमीनी हकीकत

  • अब तक में लगभग 1500 डॉक्टर ही हो सके नियुक्त
  • अस्पतालों में अक्सर दवाइयों की कमी बनी रहती है।
  • सभी जिलों में ट्रामा सेंटर व आइसीयू के लिए काम नहीं हो सका शुरू
  • सरकारी अस्पतालों में एक भी सुपरस्पेशलिस्ट डाक्टरों की नियुक्ति नहीं
  • स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए हाई कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हुआ
  • टेलीमेडिसिन भी कुछ ही जगहों में सिमटी
  • बांड धारी डाक्टरों को लेकर ठोस नीति जमीन पर नहीं उतरी
  • एचआइवी के लिए बने एंटी रिट्रोवायरल सेंटर भी बदहाल
  • डाॅक्टरों के लिए ट्रांजिट हास्टल तक की नहीं सुविधा

प्रदेश में डॉक्टरों व अस्पतालों की स्थिति व बजट

  • 2109 अस्पताल हैं प्रदेश में
  • 2715 पद डाक्टरों के स्वीकृत
  • 1900 डाक्टर ही कार्यरत
  • 815 डाक्टरों की है कमी
  • 01 भी हार्ट सर्जन व न्यूरोसर्जन नहीं

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