शिवानी की आत्महत्या का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, हॉस्‍टल में फंदे से लटका मिला था छात्रा का शव

348

 एमबीबीएस की छात्रा शिवानी की आत्महत्या का मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। मृतक के पिता ने पुलिस एवं मेडिकल कॉलेज पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। इसके लिए उन्होंने हाईकोर्ट से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

मोहल्ला गुजरातियान निवासी हरीश बंसल की 23 वर्षीय पुत्री शिवानी बंसल राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी। यह उसका तीसरा वर्ष था। 24 फरवरी 2018 को शिवानी कॉलेज के हॉस्टल में फांसी के फंदे पर लटकी हुई मिली थी। इस दौरान उसके कमरे से मिले सुसाइड नोट में उसने अपने परिजनों से माफी मांगने के साथ उल्लेख किया था कि वह  एमबीबीएस की पढ़ाई नहीं करना चाहती थी।

यह भी पढ़े :  जसप्रीत बुमराह ने टेस्ट क्रिकेट में कई रिकॉर्ड्स अपने नाम किए

उसका मकसद खिलाड़ी बनना था। परिजनों ने सुसाइड नोट पर संदेह जाहिर कर शिवानी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का अज्ञात पर आरोप लगाया था। श्रीनगर, गढ़वाल पुलिस ने आईपीसी की धारा 306 के तहत अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। मृतका के पिता का आरोप है कि मौत के 12 घंटे बाद उन्हें घटना की सूचना दी गई। जबकि उनकी पुत्री बचपन से ही मेधावी छात्रा रही थी, वह आत्महत्या नहीं कर सकती थी।

जो सुसाइड नोट दिया गया है वह उनकी पुत्री का लिखा हुआ नहीं है। आरोप लगाया कि पुत्री की हत्या कर उसे लटकाया गया था। कॉलेज प्रशासन ने उसकी हत्या पर पर्दा डालने के लिए आत्महत्या का रूप दिया है। कॉलेज तथा पुलिस इस मामले को रफादफा करने में जुटी है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच के लिए हाईकोर्ट की शरण ली है।

छात्रा के पिता हरीश बंसल ने कहा कि शिवानी के शव को निकालने के लिए जिस कमरे के वेंटिलेटर की जाली काटी गई पुलिस ने उसकी वीडियो क्यों नहीं बनाई। जांच में हो रही देरी से साक्ष्य मिटने का अंदेशा है। उनके द्वारा की जा रही न्यायिक कार्रवाई से उन्हें जान का खतरा हो गया। इसके लिए उसने एसएसपी उधम ङ्क्षसह नगर से सुरक्षा की गुहार लगाई है।

यह भी पढ़े : ससुरालियों ने नवविवाहिता को जिंदा जलाने की कोशिश की