जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं, लापरवाही से हुई गर्भवती की मौत, आधे प्रसव के दौरान कर दिया था रेफ़र

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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में जिला अस्पताल से गंभीर हालत में हायर सेंटर रेफर की गई गर्भवती महिला की मौत हो गई। परिजनों ने महिला के इलाज में घोर लापरवाही बरतने और उसे समय पर उपचार नहीं देने का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा काटा।

इस दौरान डाक्टर और सीएमएस में भी तीखी नोकझोंक हुई। जिलाधिकारी ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। इधर मृतका के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र सौंपकर महिला के इलाज में लापरवाही बरतने वाले डाक्टर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। पुलिस ने पंचनामा व पोस्टमार्टम के बाद मृतका का शव परिजनों को सौंप दिया है।

कांडा-सिमतोली निवासी सुभाष चंद्र थपलियाल जसोली में दुकान चलाते हैं। उनकी पत्नी आशा देवी (30) अपनी सात वर्षीया बेटी को पढ़ाने के लिए यहां पुनाड़ में किराए के मकान में रह रही थी।

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बुधवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर परिजन नौ बजे उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। महिला को अस्पताल में भर्ती कर दिया गया। पूर्वाह्न 11 बजे तक प्रसव होने की बात कही गई। इसके बाद चिकित्सक व पैरा मेडिकल स्टाफ द्वारा प्रसव का समय दोपहर बाद 2 बजे, फिर 5 बजे, फिर 7 बजे, 9 बजे और 11 बजे रात्रि बताया गया।

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परिजनों को भी बार-बार जल्द प्रसव होने की बात बताई गई, लेकिन इसी बीच देर रात 11.30 बजे अचानक परिजनों से कह दिया गया कि महिला की तबियत बिगड़ गई है। रक्तस्राव रुक नहीं रहा है, उसे हायर सेंटर ले जाओ। अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में कागजी कार्रवाई पूरी करते हुए महिला को बेस अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

महिला के देवर मनोज थपलियाल ने बताया कि रुद्रप्रयाग अस्पताल में प्रसव होना शुरू हो गया था। बच्चे का सिर बाहर आने लगा था, बावजूद उसे रेफर किया गया। रात्रि पौने एक बजे वे बेस अस्पताल पहुंचे। महिला को ऑक्सीजन मॉक्स लगाया गया, लेकिन दस मिनट बाद ही उसकी मौत हो गई।

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इधर, बुधवार को बेस अस्पताल से शव लेकर जिला अस्पताल पहुंचे परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर मामले में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। कहा कि सुबह नौ बजे भर्ती महिला की रात्रि 11 बजे तक क्यों सुध नहीं ली गई।

अगर, स्थिति गंभीर थी, तो उन्हें पहले क्यों जानकारी नहीं दी गई। अंतिम क्षणों में रेफर कर डाक्टर व प्रबंधन ने अपना पल्ला झाड़ने का काम किया है। उन्होंने नारेबाजी करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।

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इधर, हंगामे की सूचना पर एडीएम गिरीश गुणवंत, एसडीएम सदर देवानंद, सीओ एसपी बडोला और कोतवाल कुंवर सिंह बिष्ट भी मय फोर्स अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित पक्ष से वार्ता कर उन्हें त्वरित उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिस पर वे मान गए।

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महिला सामान्य प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची थी। उसका स्वास्थ्य व सभी रिपोर्ट भी ठीक थी, लेकिन रात्रि को अचानक तबियत बिगड़ने के कारण उसे रेफर करना पड़ा। मैं स्वयं भी संबंधित डाक्टर व स्टॉफ से इस केस की पूरी जानकारी ले रहा हूं। अगर, लापरवाही सामने आई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
– डीसी सेमवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग

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एसडीएम सदर की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई है, जिसमें सीएमओ और एसीएमओ को शामिल किया गया है। जांच रिपोर्ट के बाद ही मामले में कार्रवाई होगी। साथ ही जिला स्तर पर मातृ-शिशु जन्म-मृत्यु मामलों से संबंधित समिति द्वारा भी इस पूरे प्रकरण की अलग से जांच की जाएगी।
– मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग

महिला के ससुर देवेश्वर थपलियाल ने संबंधित डाॅक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि डाॅक्टर की लापरवाही से ही उनकी बहू की जान गई है। उन्होंने बताया कि उनकी बहू की सात साल की बालिका भी है। वह अपनी मां की राह देख रही है। अब उसकी देखभाल कौन करेगा ? एडीएम गिरीश गुणवंत का कहना है कि पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच की जा रही है।