ओएनजीसी प्रबंधन को पॉलीटेक्निक की मान्यता पर नोटिस

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ओएनजीसी प्रबंधन और ओएनजीसी महिला पॉलीटेक्निक कर्मचारी संघ का विवाद अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। सत्र 2019-20 के लिए एआइसीटीई (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन) की स्वीकृति बीएस नेगी (पूर्व नाम ओएनजीसी) महिला पॉलीटेक्निक को न मिल पाने के चलते संस्थान के 23 कार्मिकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।

जिसमें कार्मिकों ने एआइसीटीई पर ओएनजीसी प्रबंधन के साथ मिलीभगत कर स्वीकृति न देने का आरोप लगाया है। याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की पीठ ने पेट्रोलियम मंत्रालय, ओएनजीसी के सीएमडी, एआइसीटीई समेत 17 को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। प्रकरण में अब 18 जून को सुनवाई की जाएगी।

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याचिका में कर्मचारियों ने ओएनजीसी प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इसमें कहा गया है कि ओएनजीसी हमेशा संस्थान को एक सोसाइटी के अधीन बताता रहा है, जबकि इसमें ओएनजीसी के स्थायी अधिकारियों की तैनाती भी की जाती रही है। साथ ही कहा गया है कि पिछले करीब 32 सालों से एआइसीटीई संस्थान को मान्यता देता रहा है, जबकि जनवरी 2019 में एआइसीटीई की जांच में कहा गया कि ओएनजीसी प्रबंधन ने उन्हें कोई दस्तावेज नहीं दिखाए।

जिसके चलते सत्र 2019-20 के दाखिले की स्वीकृति जारी नहीं की जा सकी। यह सब संस्थान को बंद करने की सोची-समझी साजिश के तहत किया जा रहा है और इससे 350 छात्राओं व दर्जनों कार्मिकों के भविष्य पर भी संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा याचिका में संस्थान में भ्रष्टाचार व्याप्त होने का आरोप लगाते हुए सीबीआइ या एसआइटी जांच की मांग भी कोर्ट से की गई है।

न्यायाधीश सुधांशु धूलिया ने भी एआइसीटीई के अधिवक्ताओं से सवाल किए कि यदि इस दफा दस्तावेज न मिल पाने के चलते मान्यता नहीं दी गई तो इतने साल किन दस्तावेजों पर संस्थान को संचालित करने की अनुमति दी जाती रही। वहीं, पॉलीटेक्निक के कार्मिकों की ओर से याचिका दाखिल करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता एमसी पंत ने बताया कि ओएनजीसी सीएमडी कार्यालय, निदेशक एचआर को नोटिस तामील करा दिए गए हैं। 20 से शुरू होगी काउंसिलिंग

ओएनजीसी महिला पॉलीटेक्निक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि सत्र 2019-20 के लिए उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद संयुक्त प्रवेश परीक्षा पॉलीटेक्निक-2019 के अंतर्गत 20 जून से काउंसिलिंग करा रही है। मान्यता पर अभी तस्वीर साफ नहीं है और उम्मीद है कि कोर्ट के माध्यम से इसकी अनुमति मिल जाएगी। लिहाजा, काउंसिलिंग की तैयारी की जा रही है और तय समय पर संबंधित अभ्यर्थी व उनके अभिभावक संस्थान में उपस्थित हो सकते हैं।

इसलिए उपजा है विवाद

27 जून 1987 को ओएनजीसी महिला समिति के माध्यम से इस संस्थान को शुरू किया गया था। ओएनजीसी प्रबंधन इस संस्थान को हमेशा समिति का संस्थान मानता रहा है, जबकि यहां के कार्मिक इसे ओएनजीसी प्रबंधन का बताते रहे हैं। कार्मिकों का तर्क है कि जब यह संस्थान ओएनजीसी का नहीं तो फिर यहां पर ओएनजीसी के स्थायी अधिकारियों की क्यों तैनाती कराई जाती है। संस्थान की गवर्निंग बॉडी में भी ओएनजीसी प्रबंधन का ही दखल रहता है। पिछले साल भी यह विवाद बढ़ा था और दाखिलों पर तक रोक लगा दी गई थी। हालांकि, सरकार व प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद रोक हटा दी गई। अब यह विवाद फिर इसलिए खड़ा हुआ कि एआइसीटीई ने संस्थान को आगामी सत्र के लिए स्वीकृति नहीं दी।

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