लापरवाही: चलती स्कूल बस की खिड़की से गिरा छात्र, पिता ने दर्ज कराया मुकदमा

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अगर आपका बच्चा स्कूल की बस या वैन से स्कूल जाता-आता है, तो यह खबर आपके लिए अहम है और सजग करने वाली भी। दरअसल, चार दिन पूर्व स्कूल से घर आते समय साढ़े तीन साल का बच्चा स्कूल बस की खिड़की से नीचे गिर गया। उसके सिर और चेहरे में गंभीर चोटें आई हैं। छात्र को कई टांके लगे हैं। छात्र के माता-पिता का आरोप है कि घटना होने के बाद भी प्रबंधन ने अब तक यह नहीं बताया कि हादसा कैसे और किसकी लापरवाही से हुआ।

फिलहाल बच्चे की मां ने प्रेमनगर थाने में स्कूल प्रबंधन और वहां के स्टॉफ के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम और आइपीसी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।घटना आठ मई की है। पेशे से बिजनेसमैन एसके गुप्ता निवासी मांडूवाला, निकट शिव मंदिर, प्रेमनगर अभी छह महीने पहले ही दिल्ली से देहरादून शिफ्ट हुए हैं।

यहां व्यवस्थित होने के बाद उन्होंने अपने साढ़े तीन साल के बेटे अंश का भाऊवाला के दून हेरिटेज स्कूल में प्ले गु्रप में दाखिला करा दिया। रोज-रोज स्कूल से लाने व ले जाने में होने वाली असुविधा से बचने के लिए स्कूल की बस लगा दी। बीती आठ मई को अंश रोज की तरह स्कूल गया, लेकिन दोपहर में जब वह काफी देर तक स्कूल से घर नहीं आया तो परिजनों को चिंता हुई।

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अंश की मां मंजिता ने स्कूल में फोन किया तो बताया गया कि अंश को चोट लग गई है, लेकिन वह ठीक है। अंश को चोट लगने की बात सुनते ही मंजिता घबरा गईं। उन्होंने दिल्ली में अपने पति को फोन किया और खुद स्कूल पहुंचीं। वहां देखा तो बच्चे के चेहरे पर काफी चोटें लगी थीं, जिससे खून बह रहा था। बेटे की हालत देख मंजिता रोने लगीं, स्कूल स्टॉफ ने जैसे-तैसे उन्हें संभाला। इसके बाद बच्चे को लेकर एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां अंश के चेहरे, पलक और होंठ पर टांके लगे। एसके गुप्ता ने बताया अंश की तबीयत अब ठीक है, लेकिन अभी वह काफी डरा हुआ है।

एसओ प्रेमनगर नरेंद्र गहलावत ने बताया कि अंश के पैरेंट्स की ओर से मिली तहरीर के आधार पर स्कूल की प्रिंसिपल और स्टॉफ के विरुद्ध आइपीसी की धारा 279 (लापरवाही से गाड़ी चलाना), 337 (जीवन को खतरे में डालने वाला जख्म) व किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 (बालक के प्रति क्रूरता) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

डरा हुआ है अंश

स्कूल बस से हुए हादसे के बाद से अंशक बेहद डरा हुआ है। उसके पिता एसके गुप्ता ने बताया कि वह कभी-कभी बेहोश हो जा रहा है। अभी स्कूल जाने की स्थिति में नहीं आया है।

स्कूल से कटवा देंगे नाम

एसके गुप्ता ने कहा कि जिस स्कूल की बस में उनका बच्चा सुरक्षित नहीं है, वहां वह बच्चे को दोबारा भेजना खतरे से खाली नहीं है। देखेंगे कि अब अंश का किसी नजदीक स्कूल में दाखिला हो जाए। खास तौर पर ऐसे स्कूल में जहां बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाता हो।

पांच साल तक की हो सकती है सजा

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि बच्चे के स्कूल बस में बैठने से पढ़ाई करने और वापस घर पहुंचने तक की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होती है। मामले में दर्ज मुकदमे में आइपीसी की धारा 279 व 337 में अधिकतम छह माह की सजा का प्रावधान है, जबकि जेजे एक्ट की धारा 75 के तहत अधिकतम पांच साल कठोर कारावास या पांच लाख रुपये जुर्माना या फिर दोनों हो सकता है।

चालक-परिचालक को हटाया

दून हेरिटेज स्कूल के उप प्रधानाचार्य ओपी शर्मा ने बताया कि हादसे के बाद स्कूल बस के चालक व परिचालक को हटा दिया है। घटना के बाद एसके गुप्ता को फोन कर रहे थे, लेकिन फोन नहीं लगा। तब कार भेज कर बच्चे की मां को स्कूल लाया गया और उनके सामने बच्चे का इलाज कराया गया। बच्चा अब बिल्कुल ठीक है।

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