नैनीताल सैलानियों से गुलज़ार, नैनी झील का जलस्तर पहले से पांच फीट अधिक

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देश भर में गर्मी बढ़ने के साथ ही देश भर से पर्यटक गर्मी से बचने को ठंडी आबोहवा में मौज-मस्ती के लिए हिल स्टेशनों में पहुंच रहे हैं। उत्तर भारत के मशहूर हिल स्टेशनों में से एक शिमला में पानी को लेकर महाभारत छिड़ी हुई है, वहीं इस बार नैनीताल में राहत है।

पिछले साल के मुकाबले इस बार नैनी झील का पानी ज्याया नहीं सूखा है। इस बार नैनीताल में पानी की कमी जैसी कोई समस्या नहीं है। पिछले साल के मुकाबले इस बार नैनी झील में 5 फीट ज्यादा पानी है।

पिछले साल हुई पानी की समस्या से सबक सीखते हुए नैनीताल में इस बार जिला प्रशासन ने पानी को लेकर मुस्तैदी दिखाई जो कि कारगर साबित हुई है।

शहर में चल रहे रोस्टिंग से नैनी झील से पानी का दोहन कम हुआ है और झील में इस बार 5 फीट से ज्यादा पानी है। हालांकि अब भी शहर में तमाम जल संस्थानों की पेयजल लाइनों में लीकेज से रोज लाखों लीटर पानी लगातार बर्बाद हो रहा है।

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इस साल नैनी झील का जलस्तर 76.5 फीट है। पिछले साल इन दिनों झील का जलस्तर 71 फीट था जिससे डेल्टा बनने लगे थे। इस साल के जलस्तर को राहत भरा माना जा रहा है।

साल 1950 तक नैनीताल शहर की पेयजल आपूर्ति झील के पानी से नहीं होती थी। साल 1951 में पीने के पानी के लिए एक कार्ययोजना तैयार हुई जिसके तहत शुरुवात में झील से 6 लाख लीटर पानी लिया जाने लगा जो चार साल में ही बढ़कर दोगुना हो गया यानि कि 1954 तक 12 लाख लीटर पानी झील से निकाला जाने लगा।

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पर्यटन और जनसंख्या का दबाव झील पर इस कदर बढ़ा कि वर्तमान में झील से 19 एमएलडी पानी रोज लिया जा रहा है। झील से हो रही पेयजल आपूर्ति का असर पहली बार 1974 में दिखा जब झील के पानी में 6 फीट की गिरवाट दर्ज हुई।

इसके बाद झील से हो रही पेयजल आपूर्ति के विकल्प पर भी सोचा जाने लगा लेकिन इसमें अब तक कोई सफलता नहीं मिल सकी। इसका परिणाम यह हुआ कि झील के पानी का स्तर 18 फीट तक गिर गया है।

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जिला प्रशासन ने इस बार जनवरी से ही शहर में पानी की रोस्टिंग शुरू कर दी थी और इसमें आम नागरिकों के साथ ही होटेल मालिकों का भी सहयोग लिया गया।

इस दौरान जल संस्थान ने पीने के पानी में रोस्टिंग लागू कर झील से 19 एमएलडी की बजाय 8 एमएलडी पानी लिया जाने लगा। इसी कटौती के चलते पिछले साल के मुकाबले झील का जलस्तर 5 फीट ज्यादा दिख रहा है। यही कारण है कि नैनीताल में शिमला जैसे हालात नहीं बने।

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हालांकि पानी की रोस्टिंग से शहर के उंचाई वाले स्थान सात नंबर, चार्टन लांज, स्नोव्यू समेत बारा पत्थर, आयारपाटा और शेरवानी में पानी की दिक्कतें हो रही हैं। इन क्षेत्रों में कई दिन तक पानी न चढ़ने से स्थानीय लोगों में रोष भी पनप रहा है लेकिन प्रशासन इसे साधने में फिलहाल सफल दिखता है।