आखिर कैसे आपदा पीडि़त बच्ची से दुष्कर्म मामले में आरोपित हाई कोर्ट से बरी

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हाई कोर्ट ने केदारनाथ आपदा में परिवार से बिछड़ी बच्ची से दुष्कर्म मामले में निचली कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए कबाड़ी को दोषमुक्त करार दिया है। कबाड़ी ने जेल से उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को निचली कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील के लिए पत्र भेजा था। इसके बाद उसे राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से न्याय मित्र मुहैया कराया गया था।

अभियोजन के अनुसार, 27 अगस्त 2014 को केदारनाथ आपदा में परिवार से बिछड़ी 10 वर्षीय बच्ची ने टिहरी जिले के थाना चंबा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसके अनुसार, उसके माता-पिता, भाई-बहन केदारनाथ आपदा में बह गए थे। केदारनाथ से उसे फौजियों द्वारा हेलीकॉप्टर से हरिद्वार लाया गया। यहां से कबाड़ी अजय किशोरी को चंबा ले आया और उसे अपने साथ रख लिया।

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जहां कबाड़ी तमिलनाडु निवासी मनीराम ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने धारा-376 व पॉॅक्सो अधिनियम के तहत केस दर्ज किया। जिला जज टिहरी ने आरोपित मनीराम को दुष्कर्म मामले में दोषी करार देते हुए दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके खिलाफ जेल में बंद मनीराम ने निचली कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील को लेकर मुख्य न्यायाधीश को जेलर के माध्यम से पत्र भेजा। कोर्ट ने पत्र का संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एसके मंडल को न्याय मित्र नियुक्त किया।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा घटना के कुछ समय बाद मिले पीडि़ता के पिता ने बेटी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने का उल्लेख किया था। मेडिकल रिपोर्ट में भी दुष्कर्म की पुष्टिï नहीं हुई थी। निचली कोर्ट ने इन तथ्यों पर गौर नहीं किया। न्यायाधीश न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद निचली कोर्ट से सजायाफ्ता मनीराम को दोषमुक्त करार दिया।

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