Haridwar Kumbh 2021: कुंभ से बदल गई ज्वालापुर रेलवे स्टेशन की रंगत

56

 अगर आप कोरोना काल से पहले ज्वालापुर रेलवे स्टेशन के भीतर गए होंगे, तो मौजूदा स्वरूप देखकर स्टेशन को पहचान नहीं पाएंगे। कुंभ से हरिद्वार ही नहीं आस-पास के इलाकों की रंगत भी बदल रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ज्वालापुर रेलवे स्टेशन है।

लंबे अरसे से अव्यवस्थाओं का शिकार चले आ रहे ज्वालापुर रेलवे स्टेशन का कुंभ के तहत कायाकल्प हो गया है। अभी तक रेलवे स्टेशन पर प्रकाश, पेयजल, शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का टोटा था, मगर कुंभ के मद्देनजर ज्वालापुर रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। कुंभ मेला व उसके बाद कई महत्वपूर्ण रेलगाडिय़ों का स्टापेज भी ज्वालापुर रेलवे स्टेशन पर करने की तैयारी चल रही है। जिससे कुंभ व स्नान पर्वों पर हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को इसका काफी लाभ मिलेगा।

यह भी पढ़ें :   सियासत की अनूठी शैली ने हरीश रावत को प्रदेश की राजनीति में अब भी प्रासंगिक बनाए रखा

रेलवे स्टेशन पर हुए कार्य

– रेलवे स्टेशन पर दो की जगह अब तीन प्लेटफार्म बनाए गए हैं।

– आरक्षण केंद्रों पर काउंटर की संख्या बढ़ाकर तीन कर दी गई है।

– एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर आने जाने के लिए दो फुटओवर ब्रिज बनाए गए हैं।

– किसी भी गतिविधि पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

– रेलवे स्टेशन पर बेहतर गुणवत्ता वाला अनाउंसमेंट सिस्टम लगाया गया है।

– ट्रेनों के आगमन व प्रस्थान की जानकारी के लिए इलेक्ट्रॉनिक डिस्पले बोर्ड लगाया गया है।

– रेलवे स्टेशन पर रोशनी का माकूल इंतजाम किया गया है।

– प्लेटफार्म के ऊपर पांच पैसेंजर शेड बनाए गए हैं।

– प्लेटफॉर्म नंबर दो और तीन पर पानी की 10 और प्लेटफार्म एक पर छह टोंटी वाले नल।

– स्टेशन के बाहर पुरानी कैंटीन को तोड़कर सुरक्षाकर्मियों के लिए बनाया गया पोस्ट।

कुंभ सनातन धर्म का सबसे बड़ा पर्व

भूपतवाला स्थित श्रीश्री आत्म योग निकेतन धाम में मंगलवार को संत समागम आयोजित किया गया। इस मौके पर बाबा हठयोगी महाराज ने कहा कि कुंभ मेला भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म का सबसे बड़ा पर्व है। जो देश में एकता व अखंडता कायम रखता है। देश विदेश से करोड़ों श्रद्धालु मेले के दौरान पतित पावनी मां गंगा में आचमन कर अपने जीवन को भवसागर से पार लगाते हैं। कुंभ मेले को सकुशल संपन्न कराना सभी का दायित्व है। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महंत विष्णु दास महाराज ने कहा कि अखाड़े, आश्रम और संत परंपरा से ही विश्व भर में भारत का एक अलग स्थान है।

महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी महेश आनंद महाराज ने कहा कि संत महापुरुषों के सानिध्य में ही व्यक्ति का कल्याण संभव है। इस अवसर पर महंत राजेंद्रदास महाराज, महंत प्रहलाद दास, महंत देवानन्द सरस्वती, महंत कमलदास, महंत प्रेमदास, महंत अवध बिहारी दास, महंत सूरजदास, महंत अरूणदास, महंत सुमित दास, महंत पटवारी महाराज आदि संतजन मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें :   Guru Gobind Singh Jayanti: राज्यपाल मौर्य और सीएम त्रिवेंद्र ने दी गुरु गोविंद सिंह के जन्मदिवस की बधाई