अवकाश के लिए कर रहे कर्मचारी महासंघ ने स्थगित किया आंदोलन

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गढ़वाल मंडल विकास निगम संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने अध्यक्ष के अधिकारियों के साथ वार्ता के भरोसे पर आंदोलन स्थगित कर दिया है। महासंघ ने निर्णय लिया कि यदि 20 सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई न हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। इधर, महासंघ ने एमडी के उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर भी नाराजगी जाहिर की है।

गढ़वाल मंडल विकास निगम में वेतन, पदोन्नति, सातवें वेतन का लाभ दिए जाने समेत अन्य मांगों को लेकर संयुक्त कर्मचारी महासंघ आंदोलनरत है। महासंघ ने एक मार्च से आंदोलन की चेतावनी दी थी। मगर, इस दौरान अंतरराष्ट्रीय योग शिविर के आयोजन के चलते आंदोलन स्थगित किया गया।

इस बीच निगम के अध्यक्ष महावीर रांगड़ ने महासंघ को वार्ता के लिए बुलाया। अध्यक्ष ने भरोसा दिया कि आंदोलन से निगम को नुकसान होगा। ऐसे में अधिकारियों के साथ संयुक्त वार्ता की जाएगी। महासंघ के जो जायज मांगें हैं, उनका निस्तारण किया जाएगा।

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महासंघ के कार्यकारी अध्यक्ष पुरुषोत्तम पुरी, महासचिव मनमोहन चौधरी ने बताया कि कई मामलों में एमडी कर्मचारियों का उत्पीडऩ कर रही हैं। कर्मचारियों से काम लेने की बजाय एमडी उत्पीडऩ कर हतोत्साहित कर रही हैं। इससे निगम कर्मचारियों में भारी नाराजगी हैं। सीआर खराब करने से लेकर ट्रांसफर और निलंबन की कार्रवाई से कर्मचारी भयभीत हैं।

एक दिन के वेतन को लेकर अब अवकाश भर रहे कर्मचारी

आवास भत्ते में बढ़ोतरी समेत विभिन्न मांगों को लेकर एक दिन के सार्वजनिक अवकाश पर रहने वाले कर्मचारियों का वेतन कटने के बाद कर्मचारी बैकफुट पर हैं। वेतन में एक दिन का ब्रेक होते देख अब कई विभागों में कर्मचारियों ने अब उक्त दिवस यानी 31 जनवरी की अनुपस्थिति का अब अवकाश भरना शुरू कर दिया है।

वहीं, राज्य अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक समन्वय समिति के प्रतिनिधियों ने अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से मुलाकात कर कर्मचारियों का एक दिन का वेतन स्वीकृत करने का अनुरोध किया। सूत्रों की मानें तो फिलहाल इस संबंध में पत्रावली मुख्य सचिव के पास है और इस संबंध में होने वाली बैठक में यह मसला लाया जा सकता है।

राज्य कर्मचारियों ने 31 जनवरी को विभिन्न मांगों को लेकर एक दिन का सार्वजनिक अवकाश रखने का एलान किया था। वहीं, सरकार ने भी इस पर सख्ती दिखाते हुए नो वर्क नो पे का आदेश जारी किया था। कोषागारों को भेजे गए आदेश में यह स्पष्ट किया गया था कि जो कर्मचारी उस दिन अवकाश पर रहेगा उसका एक दिन का वेतन काट दिया जाएगा।

इस दौरान कई कर्मचारी अवकाश पर रहे तो कई कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी बजाई। हालांकि, बायोमीट्रिक हाजिरी में सबकी उपस्थिति दर्ज न होने के कारण विभागों के सामने नए सिरे से वेतन बनाने की स्थिति पैदा हो गई थी।

नतीजतन, छह फरवरी को कर्मचारियों के खातों में वेतन आया लेकिन वह भी एक दिन का कटा हुआ। इसके बाद विभागीय सचिव व विभागाध्यक्षों की सत्यापित सूची के आधार पर एक दिन का वेतन देने का निर्णय लिया गया। इस माह ऐसे कई कर्मचारियों का वेतन आ गया है।

वहीं, हड़ताली कर्मचारी यह उम्मीद कर रहे थे कि सरकार चुनावी वर्ष में नरमी दिखाते हुए सार्वजनिक अवकाश को नियमित अवकाश के रूप में रख कर उन्हें भी एक दिन का वेतन दे देगी। ऐसा न होने से कर्मचारियों के सामने वेतन ब्रेक होने का संकट आ गया, जिसका असर सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले फंड पर पड़ता है।

इसे देखते हुए कर्मचारी अब एक दिन का अवकाश ले रहे हैं और इसकी स्वीकृति के लिए आवेदन अधिकारियों को दे रहे हैं। वहीं, अब आचार संहिता लगने का समय निकट देख राज्य अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक समन्वय समिति के पदाधिकारियों ने अब इस मसले पर शासन में जोर लगाना शुरू कर दिया है।

सचिवालय संघ के अध्यक्ष व समन्वय समिति के समन्वयक दीपक जोशी, राकेश जोशी और ठाकुर प्रह्लाद सिंह ने अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से इस मसले पर मुलाकात की। सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी ने उम्मीद जताई कि सरकारी कर्मचारी हित में जल्द कदम उठाएगी।

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