दून निवासी रि. विंग कमांडर ने सबसे पहले उठाई थी सेना में महिलाओं को बराबरी का हक दिलाने की आवाज

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17 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद थलसेना में महिलाओं को बराबरी का हक मिलने का रास्ता साफ  हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने एक अहम फैसले में कहा कि ‘उन सभी महिला अफ सरों को तीन महीने के अंदर आर्मी में स्थायी कमीशन दिया जाए, जो इस विकल्प को चुनना चाहती हैं’।

स्थायी कमीशन के लिए सबसे पहले देहरादून निवासी रिटायर विंग कमांडर अनुपमा जोशी ने आवाज उठाई थी। भले ही रिटायर होने पर उन्हें इसका फायदा नहीं मिला लेकिन, उनकी यह पहल अन्य महिलाओं के लिए काम आई। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। जबकि, पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कहा कि शुरूआत में भले ही कुछ दिक्कत आएगी लेकिन, कुछ साल बाद सब ठीक हो जाएगा।

1992 में एयर फोर्स में चयन हुआ था

अनुपमा जोशी का 1992 में एयर फोर्स में चयन हुआ था। उसके बाद वह अपनी मेहनत और जज्बे के बल पर आगे बढ़ती रहीं। पहले पांच साल की सर्विस के बाद उन्होंने स्थायी कमीशन देने की आवाज उठाई तो उन्हें तीन साल का एक्सटेंशन मिला। फिर तीन साल का एक्सटेंशन मिला। हर बार टुकड़ों में मिल रहे एक्सटेंशन से वह बहुत खिन्न थी।
इसके विरोध में उन्होंने 2002 में अपने सीनियर अधिकारियों से लिखित में जवाब मांगा। लेकिन, जवाब नहीं मिला। चीफ  को पत्र लिखा। लेकिन, वहां से भी जवाब नहीं आया। इसके बाद उन्होंने 2006 में अन्य महिला अधिकारियों के साथ कोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने केस की सुनवाई में नई भर्तियों को स्थायी कमीशन देने का फैसला दिया। लेकिन, सेवारत महिला अधिकारियों का फैसला नहीं हो पाया।

पूर्व सैनिक अधिकारियों ने भी किया स्वागत  

अनुपमा जोशी वर्ष 2008 में रिटायर हुईं। लेकिन, उनका संघर्ष जारी रहा। 2010 में कोर्ट के निर्देश पर एयर फोर्स में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का फैसला आया। लेकिन, इस फैसले से सेना ने खुद को अलग कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में मामला चलता रहा। सोमवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए अनुपमा ने कहा आखिर जो जंग उन्होंने छेड़ी थी आज मुकाम तक पहुंच गई है। इससे वह बेहद खुश हैं।
महिलाओं को सेना में स्थायी कमीशन को पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में इसमें दिक्कत आ सकती है, लेकिन धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। ले.जनरल गंभीर सिंह नेगी ने कहा कि यह फैसला ऐतिहासिक है। सेना में कई पोस्ट ऐसी हैं, जिसमें महिलाओं को कमांड दी जा सकती है।
हालांकि सेना, महिलाओं को सीधे युद्ध में नहीं झोंक सकती। कोर्ट ने भी यह फैसला सेना पर छोड़ा है। वहीं ले.जनरल आनंद स्वरूप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। शुरुआत में इसमें कुछ दिक्कत आएंगी। लेकिन चार-पांच साल बाद ठीक हो जाएगा। यह भी देखना होगा कि हमारी सोसायटी इसे कैसे देखती हैं। उन्होंने भी कहा कि सेना में कई पोस्ट ऐसी हैं जहां महिलाएं बेहतर कर सकती हैं।

सेना में बड़ी संख्या में हैं उत्तराखंड निवासी महिला अफसर

सेना में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन मिलने से उत्तराखंड की बेटियों में सेना के प्रति और आकर्षण बढ़ेगा। सैन्य धाम उत्तराखंड से सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के तहत बड़ी संख्या में महिला अफसर तैनात हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महिला अफसरों को स्थायी कमीशन का विकल्प मिलेगा।

उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बाद उत्तराखंड देश का तीसरा राज्य है, जहां से सेना में सबसे ज्यादा अफसर हैं। लेकिन जनसंख्या घनत्व के आधार पर उत्तराखंड सबसे बड़ा सैन्य अफसर देना वाला राज्य है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चारधाम के बाद उत्तराखंड को पांचवां सैन्य धाम माना है। त्रिवेंद्र सरकार ने देहरादून में सैन्य धाम बनाने के लिए जगह का चयन भी कर लिया है।

देश की रक्षा के लिए सर्वोच बलिदान देने वालों में उत्तराखंड के सैनिक सबसे आगे हैं। प्रदेश में हर दूसरे-तीसरे परिवार से एक जवान सेना में है। सेना में जाने पर बेटियों का भी समर्थन किया जाता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में प्रदेश की बेटियां वायु सेना, नौ सेना और भारतीय सेना में तैनात हैं।

14 साल की नौकरी के बाद आजीविका का संकट

अब तक सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत नौकरी करने वालीं महिला अफसरों को 14 साल की नौकरी के बाद वापस भेज दिया जाता था। जिससे उन्हें पेंशन की सुविधा नहीं मिल पाती थी। ऐसे में महिला अफसरों के सामने आजीविका का संकट रहता था। बता दें कि पेंशन के लिए अफसरों को 20 साल और जवान को 15 साल की नौकरी करनी अनिवार्य होती है।

इन पदों पर मिलेगा स्थायी कमीशन

महिला अफसरों को सेना शिक्षा कोर, सिग्नल, मैकेनिकल इंजीनियर, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर, आर्मी एविएशन, आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डिनेंस कोर, आर्मी एयर डिफेंस और इंटेलिजेंस कोर में स्थायी कमीशन का लाभ मिलेगा।

स्थायी कमीशन देने का फैसला सराहनीय है। इस फैसले से सेना के प्रति महिला अफसरों का आकर्षण बढ़ेगा। उन्हें वे सभी सुविधाएं मिलेंगी, जो एक पुरुष सेना अफसर को मिलती हैं।

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