अल्मोड़ा मेडिकल कालेज में डाक्टरों की तैनात

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नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) से मान्यता के लिए जूझ रहे अल्मोड़ा मेडिकल कालेज में लाख कोशिशों के बावजूद अब तक 15 प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर्स ने ही पदभार संभाला है। मानक के अनुसार यहां 45 चिकित्सक होने चाहिए। हालांकि 70 फीसद पदों पर पूर्ण रूप से तैनाती भी मान्यता में मददगार साबित होती है। प्राचार्य डा. रामगोपाल नौटियाल के अनुसार इस दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं। शासन स्तर पर प्रक्रिया चल रही है।

बुनियादी सुविधाओं व फैकल्टी के अभाव से जूझ रहे मेडिकल कालेज में चिकित्सकों की तैनाती बड़ी चुनौती बन गया है। प्राचार्य डा. रामगोपाल की लगातार पहल व प्रदेश सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक मान्यता के लिए तय पदों पर चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो सकी है।

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क्लिनिकल स्टाफ के लिए भी जद्दोजहद

कम से कम तीस डाक्टरों की तैनाती को कसरत के बीच अल्मोड़ा मेडिकल कालेज में क्लिनिकल स्टाफ का कोटा तक पूरा नहीं हो सका है। यह हाल तब है जब खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर्वतीय जिलों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा के लिए मेडिकल कालेज को सुविधा संपन्न बनाने का दावा कई बार कर चुके हैं। ऐसे में गंभीर रोगी के उपचार को क्लिनिकल स्टाफ का सपना भी अधूरा ही है।

डा. अजय बने प्रभारी प्राचार्य

प्राचार्य डा. रामगोपाल नौटियाल हालिया सड़क हादसे में घायल होने के बाद चिकित्सीय अवकाश पर हैं। कालेज का कामकाज प्रभावित न हो इसके लिए बाल रोग विशेषज्ञ डा. अजय आर्या को प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। प्राचार्य डा. रामगोपाल ने बताया कि प्रभारी प्राचार्य से हल्द्वानी से ही अल्मोड़ा के सभी कार्य देखने व उन्हें निस्तारित करने को कहा गया है। दरअसल, डा. रामगोपाल के चिकित्सीय अवकाश पर जाने के बाद से अल्मोड़ा मेडिकल कालेज का संचालन प्रभावित हो रहा था। व्यवस्थाएं सुचारू रुप से चलती रहें इसके लिए प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किए गए हैं। हालांकि इस अवधि में वित्तीय अधिकार प्राचार्य डा. रामगोपाल के पास ही रहेगा।

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