दिल्ली-देहरादून का सफर होगा सुगम, बनेगी एलिवेटेड रोड

42

दिल्ली-दून राजमार्ग के चौड़ीकरण में गणेशपुर से मोहंड तक सुगम सफर के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा का पेच हट गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) इस 16 किमी भाग पर एलिवेटेड रोड की जगह महज राजमार्ग चौड़ीकरण पर अड़ा था, जबकि वन्यजीव विशेषज्ञ इसके खिलाफ थे। अब वन्यजीवों की सुरक्षा के सवाल पर कदम पीछे खींचते हुए एनएचएआइ एलिवेटेड रोड बनाने को तैयार हो गया है। इस परियोजना की कुल लंबाई 19.38 किमी है।

सहारनपुर से लेकर देहरादून के बीच शिवालिक वन प्रभाग व राजाजी टाइगर रिजर्व का क्षेत्र आपस में जुड़ा है। इस भाग पर अक्सर यह देखने में आता है कि वन्यजीव वाहन दुर्घटना में मारे जा रहे हैं। यही वजह है कि चौड़ीकरण की परियोजना में एलिवेटेड रोड को भी शामिल किया गया। ताकि वाहन ऊपर से गुजर सकें और नीचे वन क्षेत्र में वन्यजीव स्वछंद विचरण कर सकें। इसको लेकर 30 जून 2020 को भारतीय वन्यजीव संस्थान, एनएचएआइ, शिवालिक वन प्रभाग व राजाजी टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञों ने संयुक्त सर्वे किया था। सर्वे के बाद सुझाव दिया गया था कि वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए सर्वाधिक वन क्षेत्र वाले 16 किलोमीटर भाग पर एलिवेटेड रोड बनाई जाए। कार्यदाई संस्था एनएचएआइ के देहरादून स्थित परियोजना निदेशक कार्यालय ने इस पर सहमति भी व्यक्त की थी। हालांकि, इसके बाद अचानक यह तय कर दिया गया कि गणेशपुर से लेकर मोहंड तक के भाग को एलिवेटेड बनाने की जगह पूर्व में प्रस्तावित योजना के तहत सिर्फ चौड़ा किया जाएगा।

यह भी पढ़ें :   उत्‍तराखंड में कैदियों पर नजर रखेगी बंदी रक्षकों की ‘तीसरी आंख’

जब यह जानकारी शिवालिक वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी आर बालाचंद्रन को मिली तो उन्होंने इसे औचित्यहीन कराकर दे दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सड़क को चौड़ा करने पर 10 से 15 हजार पेड़ों को काटने की नौबत आ जाएगी और वन्यजीवों की सुरक्षा का सवाल अपनी जगह खड़ा रहेगा। लिहाजा, सुझाव के ही मुताबिक गणेशपुर के पास बुढ्ढावन नर्सरी के पास एलिवेटेड रोड को घुमाव देते हुए मोहंड नदी के साथ-साथ आगे बढ़ाया जाए। फिर इसे मोहंड पर पुरानी सड़क पर मिला दिया जाए। लंबे समय तक यह मामला एचएनएआइ के स्तर पर लंबित रहने के बाद एलिवेटेड रोड को मंजूरी प्रदान कर दी गई है।

2060 करोड़ की होगी परियोजना

प्राधिकरण के परियोजना निदेशक विभव मित्तल के मुताबिक यह परियोजना करीब 2060 करोड़ रुपये की होगी और परियोजना का काम वर्ष 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के टेंडर आमंत्रित कर दिए गए हैं और कंपनी के चयन के बाद शीघ्र काम शुरू कर दिया जाएगा।

इसलिए दिया गया एलिवेटेड रोड का सुझाव

एलीवेटेड रोड वाले क्षेत्र में हाथी, चीतल, सांबर, लेपर्ड, नीलगाई, जंगली सुअर, बार्किंग डियर, रेड जंगल फाउल, पीफाउड समेत तमाम वन्यजीवों की आवाजाही लगी रहती है। ये वन्यजीव बिना किसी भय के साथ विचरण कर सकें, इसीलिए एलिवेटेड रोड का सुझाव दिया गया।

मोहंड से डाटकाली मंदिर तक बदलाव नहीं

मोहंड से डाटकाली मंदिर के बीच करीब 850 मीटर हिस्सा वन्यजीवों की आवाजाही के लिहाज से संवेदनशील है। हालांकि, इस बीच एलिवेटेड रोड पहले की तरह प्रस्तावित है।

डाटकाली मंदिर से देहरादून तक भी बदलाव नहीं

इस क्षेत्र के 200 मीटर भाग को संवेदनशील माना गया है। यहां दो एनिमल अंडरपास प्रस्तावित हैं। इस भाग में भी किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया।

यह भी पढ़ें :   राहत: यहां 967 व्यक्तियों की हुई कोरोना जांच, एक भी पॉजिटिव नहीं