नेपाल में रोकी गई भारतीय मेडिकल छात्रों की डिग्री, भारतीय दूतावास से गुहार

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नेपाल के काठमांडू विश्वविद्यालय (केयू) के अंतर्गत आने वाले मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले 134 भारतीय विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय पर मेडिकल डिग्री देने से रोकने का आरोप लगाया है। भारतीय विद्यार्थियों ने इस विषय में सभी का ध्यानाकर्षण करने के लिए एक पत्र भारतीय दूतावास सहित विभिन्न निकायों में भेजा है। सीमावर्ती शहर विराटनगर में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे महावीर गुर्जर ने अमर उजाला को बताया कि ‘विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे करीब 134 विद्यार्थियों को काठमांडू यूनिवर्सिटी द्वारा वैमनस्य की भावना के कारण मेडिकल की डिग्री नहीं दी जा रही है।

गुर्जर के अनुसार नेपाल में फिलहाल करीब तीन हजार भारतीय नागरिक मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। यहां पर पढ़ने वाले भारतीय विद्यार्थियों से 60 से 70 लाख रुपये फीस के रूप में लिए जाते हैं, जो नेपाली विद्यार्थियों से लिए जाने वाली फीस की तुलना में ढाई गुना से भी अधिक है।

इसके साथ ही गुर्जर ने काठमांडू विश्वविद्यालय पर भारतीय विद्यार्थियों के साथ कई प्रकार के भेदभाव करने का आरोप लगाया है। हालांकि अभी इस बात की कोई आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है।

क्या है मामला?

भारतीय विद्यार्थियों ने नेपाल के काठमांडू विश्वविद्यालय पर गलत इरादे से लगातार फेल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी द्वारा लगातार विद्यार्थियों को एनएफटी (नॉट फिट फॉर टेक्निकल) करार दिया जा रहा है। एनएफटी करार देने की वजह से विद्यार्थियों को दुबारा फीस का भुगतान करना पड़ रहा है। जिससे उनमें आक्रोश बढ़ रहा है। उल्लेखनीय है कि हरेक वर्ष काफी संख्या में भारतीय विद्यार्थी नेपाल के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने के लिए आते है।