उत्तराखंड में अनुसूचित जाति बाहुल्य गावों के विकास पर फोकस, राज्यपाल ने दिए ये दिशा-निर्देश

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उत्तराखंड में अनुसूचित जाति बाहुल्य गावों में स्वावलंबी अर्थव्यवस्था विकसित की जाएगी। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने निर्देश दिए कि राज्य के अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामों में त्वरित विकास के लिए कृषि और स्वरोजगार आधारित आर्थिक गतिविधियों की संभावनाओं का सर्वेक्षण किया जाए।

इन गांवों में बहुलता से पैदा होने वाले कृषि उत्पादों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही बकरी पालन, दुग्ध उत्पादन और छोटे उद्यमों जैसे आर्थिक लाभ के कार्यों के लिए ग्रामीणों को प्रोत्साहित भी किया जाए।

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राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने शुक्रवार को राजभवन में उत्तराखंड में अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामों में स्वावलंबी अर्थव्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं। राज्यपाल के निर्देशों के तहत यह कार्य देहरादून जिले से शुरू किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से राज्यपाल ने देहरादून के जिलाधिकारी और सीडीओ को भी बुलाया था।

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य जल्द ही देहरादून के एक अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव झाझरा (मजरा-बंशीवाला) का दौरा करेंगी और ग्रामीणों से सीधा संवाद करेंगी। राज्यपाल हरिद्वार, टिहरी और अन्य जनपदों के अनुसूचित जाति बाहुल्य गांवों का भी दौरा करेंगी और विकास कार्यों की समीक्षा करेंगी।

राज्यपाल मौर्य ने जनपद हरिद्वार, टिहरी, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और उत्तरकाशी के अनुसूचित बाहुल्य गांवों के विकास पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए है।

इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग ने जानकारी दी कि जनपद देहरादून के ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत अनुसूचित जाति की जनसंख्या 119123 और शहरी क्षेत्र में निवासरत अनुसूचित जाति की जनसंख्या 109778 है। जनपद देहरादून के चकराता, त्यूणी, कालसी, विकासनगर, देहरादून और ऋषिकेश तहसीलों में कुल 141 गांव अनुसूचित बाहुल्य गांव है, जहां 40 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति के व्यक्ति निवास करते हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव एल फैनई, सचिव राज्यपाल बृजेश कुमार संत, जिला अधिकारी देहरादून डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव, मुख्य विकास अधिकारी निकिता खंडेलवाल, निदेशक समाज कल्याण विभाग आदि उपस्थित थे।

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