सावधान, बाजार के मिलावटी दूध से कैंसर का खतरा

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यूनिवर्सिटीज जनरल ऑफ फाईटोकेमिस्ट्री एंड आयुर्वेदिक हाइट्स ने ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के सहयोग से हर्बल अनुसंधान, अवसर, चुनौतियों और संभावनाएं विषय पर सेमीनार का आयोजन किया। इस मौके पर संख्या नंबर 26 जर्नल पत्रिका का विमोचन किया गया।

सेमीनार के मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति एफआरआइ यूनिवर्सिटी डॉ. अश्विनी कुमार ने बताया कि जो पौधे विलुप्त हो रहे हैं, उन्हें टीश्यू कल्चर से उगाना चाहिए। जैसे बंसलोचन को कानपूर में टीश्यू कल्चर द्वारा उगाया गया है। जनरल के मुख्य संपादक डॉ. एस फारूक ने बताया कि समाज सहित हममें जागरूकता की कमी है। हमें जड़ी बूटी को उगाना चाहिए उसकी सुरक्षा और उन पर शोध करना चाहिए।

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उन्होंने ऐसी जड़ी बूटियों पर चर्चा की, जिनसे मोटापे की समस्या से निबटा जा सकता है। जैसे गार्सिनिया, गुग्गल आदि काफी लाभकारी हैं। उन्होंने मिलावटी दूध के बारे में बताया कि कैसे बाजार में नकली दूध बिक रहा है जो यूरिया, शेम्पू और डिटरजेंट सोप से बनाया जाता है। जिससे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी हो रही है।

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