भाजपा ने बनाई रणनीति चुनाव के लिए

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लोकसभा चुनाव के लिए उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की तैयारियां चरणबद्ध ढंग से चल रही हैं। करीब एक माह तक प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के जरिये पार्टी नेतृत्व ने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय किया और उनमें जोश भरा। यह कसरत पूरी हो चुकी है और हर कार्यकर्ता चुनाव के लिए कमर कस चुका है।

अब इस सक्रियता, जोश व जज्बे का उपयोग चुनाव में जीत हासिल करने के लिए रणनीति तय की जा रही है। इस सिलसिले में तीन मार्च को देहरादून में बैठक बुलाई गई है, जिसमें पार्टी के महामंत्री संगठन रामलाल, सह महामंत्री संगठन शिवप्रकाश, प्रदेश के लोस चुनाव प्रभारी थावरचंद्र गहलौत, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू भी शिरकत करेंगे। माना जा रहा कि इसमें लोस चुनाव की आगे की रणनीति तय कर इसे धरातल पर उतारने के लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।

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उत्तराखंड में भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव बेहद अहम है। पिछले चुनाव में भाजपा ने यहां की पांचों सीटों पर झंडा बुलंद किया था। हालांकि, इसके बाद विधानसभा चुनाव, स्थानीय निकाय और सहकारिता के चुनावों में भाजपा ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया। ऐसे में अब पार्टी के सामने लोस चुनाव में भी ऐसा ही प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है।

पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व भी इस बात को बखूबी समझता है और इसीलिए उसने भी राज्य को खासी तवज्जो दी है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राष्ट्रीय स्तर पर घोषित एक माह के कार्यक्रमों पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने लगातार निगाह बनाए रखी। इस अवधि में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के उत्तराखंड दौरों से यह बात साबित भी होती है।

एक माह तक चले कार्यक्रमों के तहत मुख्य फोकस बूथ स्तर तक पार्टी संगठन की मजबूती पर रहा तो छात्रों-युवाओं, महिलाओं, बुद्धिजीवियों, पूर्व सैनिकों समेत हर वर्ग को साधने की कोशिशें की गई। केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के घरों में कमलदीप रोशन कर उन्हें अहसास दिलाया गया कि भाजपा उनके परिवार की सदस्य है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार यह कवायद पूरी हो चुकी है और इसका सबसे सजल पक्ष ये रहा कि बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा चुका है। वे जोर-शोर से केंद्र व राज्य की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने में जुटे हैं। सूत्रों ने बताया कि अब इस जोश, जज्बे को बरकरार रखने के मद्देनजर लोस चुनाव के लिए आगे की रणनीति तय की जा रही है। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय नेतृत्व से मिले निर्देशों के क्रम में राज्य की परिस्थितियों के हिसाब से आगे के कार्यक्रम तय किए जाएंगे। तीन मार्च को देहरादून में होने वाली बैठक में इन पर मंथन कर मुहर लगाई जाएगी।

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