प्रकृति के बहर के बीच बीमार और प्रसूता महिलाएं कर रही हैैं प्रशासन के मदद का इंतजार

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पिथौरागढ़ में इस बार बारिश का कहर टूटा है। बंगापानी तहसील के गोरीछाल बरम न्याय पंचायत के तल्ला मोरी और तल्ला लुम्ती का रोंगटे खड़े कर देने वाला नजारा है। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण हर तरफ-मलबे ही मलबे नजर आ रहे हैं। मौत के मुहाने से बाहर निकले ग्रामीण टेंटों में डरे-सहमे रह रहे हैं। सभी को मल्ला मौरी में शिफ्ट किया गया है, अफसोस मल्ला मौरी भी खतरे की जद में है।

तल्ला मौरी गांव को 28 जुलाई की आपदा ने तबाह कर के रख दिया है। पदम सिंह परिहार, जितेंद्र सिंह, मोहन सिंह, दलीप सिंह, धरम सिंह, राजेंद्र सिंह, जौहार सिंह, देब सिंह, हयात सिंह, पूरन सिंह आदि के मकान मलबे में दबे हैं। प्रशासन की टीम गांव तक नहीं पहुंच पाई है। एनडीआरएफ, सेना और ग्रामीण खुद बचाव कार्य में लगे हैं।

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चारों तरफ नजर दौड़ाने पर केवल केवल भयावह मंजर नजर आ रहे हैं। मल्ला मौरी में रखे गए आपदा पीडितों की हालत दयनीय बनी है। कुछ बेसुध पड़े हैं। प्रशासन का आपदा राहत सामग्री चामी तक पहुंच पा रही है। वहां से आपदा के वास्तविक पीड़ितों तक सामान नहीं पहुंच पा रहा है। अपात्र इसका फायदा उठा रहे हैं ।

बच्चे बीमार पड़े हैं। आपदा प्रभावित गांवों में सौ वर्षीय सूरमा देवी, मोतिमा देवी 55 वर्ष और खिमुली देवी 56 वर्ष जैसे बुजुर्ग बीमार पड़े कराह रहे हैं। उनके उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। गांव की पुष्पा देवी और राधा देवी गर्भवती हैं और उनके प्रसव की तिथि करीब है। परिजन प्रसव पीड़ा बढ़ने पर होने वाली परेशानी को लेकर परेशान हैं।

घर, आंगन, खेत, सामान बह जाने के बार मात्र बदन में पहने कपड़ों के अलावा कुछ भी अपने पास नहीं होने से बात करते-करते मीना देवी, शीला देवी व तिला देवी बेहोश हो रही हैं। लुम्ती गांव में पूर्व प्रधान त्रिलोक सिंह, नंदन सिंह और भूपेंद्र सिंह के मकान पूरी तरह मलबे से भरे हैं। घर में रखा सारा सामान नष्ट हो गया है।

प्रह्लाद सिंह और रणवीर सिंह के घर नदी द्वारा काट कर हवा में लटके हैं। रु द्र सिंह लस्पाल, लक्ष्मण सिंह लस्पाल और खुशाल सिंह के मकान कभी भी ढहने के कगार पर हैं। जगदीश सिंह के घर पर मलबा आने से एक दर्जन से अधिक मवेशी जिंदा दफन हुए हैं।

आपदाग्रस्त गांव में फंसी चार वर्षीय शिवांशी

चार वर्षीय शिवांशी गांव में फंसी है। जहां से अपने पिता गोविंद सिंह परिहार को फोन कर कह रही है पापा हमें बचा लो । वह बीमार है, लेकिन दुगड़ी गाड़ और चर गाड़ के कहर से टापू बने गांव में फंसी शिवांशी बार-बार अपने पापा को फोन कर रही है। तीन दिन से क्षेत्र में बिजली नहीं होने से अब फोन पर भी बात नहीं हो पा रही है। गोविंद परिहार परिवार के साथ पिथौरागढ़ में रहता है। बच्चे गांव गए है और आपदा के चलते फंस गए हैं। गोंिवंद सिंह बरम तक जाता है और गांव तक जाने का विकल्प नहीं होने से पिथौरागढ़ वापस लौट रहा है।

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